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प्रदेश में तीन साल से सक्रिय था ISI नेटवर्क, इंटेलिजेंस को हवा तक नहीं लगी

भोपाल, ब्यूरो। प्रदेश में आईएसआई एजेंट का नेटवर्क पिछले तीन साल से चल रहा था लेकिन मप्र की इंटेलिजेंस को इसकी भनक तक नहीं लगी। पिछले साल यदि जम्मू के थाना आरएसपुरा में सतविंदर एवं दादू नहीं पकड़े जाते तो शायद प्रदेश में फैल चुका आईएसआई एजेंट का यह नेटवर्क भी सामने नहीं आ पाता। हालांकि मप्र एटीएस द्वारा की गई पड़ताल के चलते तीन महीने के अंदर ही पूरा रैकेट का खुलासा व मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इंटेलिजेंस क्यों फेल हो रही है।

यह पहला मामला नहीं है सिमी आतंकियों के पहले खंडवा जेल ब्रेक और फिर भोपाल जेल ब्रेक जैसी इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के योजना बनाने के दौरान भी इंटेलिजेंस को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं खंडवा जेल से फरार होने के बाद भी सिमी आंतकी कई घटनाओं को अंजाम देते व प्लानिंग करते रहे।

ओडिसा एटीएस ने उन्हें राऊलकेला से पकड़ा। प्रदेश के बाहर सिमी आतंकियों को पड़कने में पुलिस नाकाम रही। पिछले साल भी भोपाल से आईएसआई का एक एजेंट सक्रिय था जिसकी खबर इंटेलिजेंस को नहीं लगी और एनआईए की टीम ने उसे पकड़ा।

यूपी में करोड़ो की जमीन बलराम की

इधर इसे पूरे गिरोह के मुख्य सरगना बताए जा रहे बलराम के कनेक्शन उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से भी है। बताया जा रहा है कि यहां उसने 18 एकड़ की जमीन भी खरीद रखी है। जिसकी कीमत करोड़ो में बताई जा रही है। इसके अलावा अब तक हुई पूछताछ में बलराम ने उसके साथ शामिल कुछ लोगों का नाम बताया है जो कि रीवा में है। काउंटर इंटेलिजेंस की टीम रीवा भी रवाना हुई है। करीब 100 से ज्यादा खातों के जरिए आईएसआई एजेंट व हैंडलर्स के कहने पर जानकारियां भेजने वालों को पैसे भिजवाने व लॉटरी फ्रॉड के पैसों को जमा करने के लिए उनसे अपने परिचितों के नाम पर भी खाते खुलवाए थे।

उधर पाकिस्तानी एजेंटों के मददगार युवकों को कोर्ट ने 14 फरवरी तक एटीएस की रिमांड पर सौंपा है। एटीएस ने शुक्रवार को एसीजेएम सतीशचंद्र मालवीय की कोर्ट में सेठी नगर, रामपुर, जबलपुर निवासी मनोज भारती, पटेल मोहल्ला, सत्यानंद कालोनी , जबलपुर निवासी संदीप गुप्ता, न्यू मिनाल रेसीडेसी भोपाल निवासी ध्रुव सक्सेना, साकेत नगर भोपाल निवासी मोहित अग्रवाल, ई-4, अरेरा कालोनी ,भोपाल निवासी मनीष गॉधी को पेश किया था। एटीएस ने कोर्ट में रिमांड अर्जी पेश करते हुए कहा कि उन्हें आरोपी संदीप गुप्ता और मनोज भारती ने पूछताछ में बताया है कि वे जबलपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम प्राप्त करते थे।

इस तरह उन्होंने सैकड़ों सिम प्राप्त कर ली हैं। इन सिमों को वे अपने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को प्रदान कर देते थे। नेटवर्क से जुड़े हुए लोग इन सिमों को सिम बॉक्स में लगाकर देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारियॉं पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुॅंचा देते थे। इस काम में भोपाल निवासी आरोपी ध्रुव सक्सेना, मोहित अग्रवाल और मनीष गॉंधी सिम बॉक्स के माध्यम से कॉल सेंटर चलाकर कर रहे थे।

एटीएस ने कहा कि उन्हें आरोपियों से पूछताछ कर फर्जी दस्तावेज, सिम कार्ड और सिम बॉक्स में उपयोग किए गए अन्य उपकरण बरामद करने हैं। वे इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के नामों का खुलासा भी करना चाहते हैं। कोर्ट ने एटीएस के तर्कों से सहमत होते हुए रिमांड अर्जी स्वीकार कर ली है। गौरतलब है कि एटीएस ने गुरूवार को इसी मामले से जुड़े आरोपी बलराम सिंह, कुश पंडित, जितेन्द्र ठाकुर, रीतेश खुल्लर, जितेन्द्र सिंह यादव और त्रिलोक सिंह भदौरिया पुलिस रिमांड पर लिया है।

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