नीट का पेपर लीक होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को NEET (UG) 2026 परीक्षा रद्द कर दी है। यह परीक्षा 3 मई को हुई थी जिसमें 22.79 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए। अब इन सभी छात्रों के भविष्य अधर में हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और सरकार के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं। इंदौर के रीगल तिराहे पर जनहित पार्टी ने विरोध प्रदर्शन किया और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा देने की मांग की।
जनहित पार्टी के शहर अध्यक्ष स्वप्निल जोशी ने कहा कि NTA डीजी अभिषेक सिंह ने यह मान लिया है कि इस गड़बड़ी के लिए वे जिम्मेदार हैं। परीक्षा दोबारा कराई जाएगी और 6 से 8 दिन में नई तारीख का ऐलान होगा। वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत जिम्मेदार अधिकारी और नेता इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। देश में सैकड़ों परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। हर बार आरोपियों को पकड़ा जाता है और कुछ समय बाद वे छूट जाते हैं। न तो जिम्मेदारी तय होती है न ही कड़ी सजा मिलती है। इन्हीं सब कारणों से शिक्षा माफियाओं को बल मिल रहा है और हर साल देश में लाखों छात्रों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आज नीट का पेपर लीक हुआ है लेकिन हर साल कई परीक्षाओं के पेपर लीक होते हैं।
विरोध प्रदर्शन में शामिल पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि लाखों छात्राओं की ज्वेलरी उतरवाई जाती है और कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाती है। छात्र घंटों धूप में खड़े होकर परीक्षा के सुरक्षा मापदंडों से गुजरते हैं और अंत में पेपर ही लीक हो जाते हैं। देश में शिक्षा व्यवस्था की क्या हालत है इस पर आज विचार करने की जरूरत है।
कार्यकर्ताओं ने कहा सालभर तक छात्र परीक्षाओं के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। इसके बावजूद परीक्षाओं के पेपर लीक हो जाते हैं। छात्रों के साथ माता पिता का कितना पैसा लगता है, समय लगता है। सब खराब हो जाता है। इसके साथ भविष्य क्या होगा यह भी नहीं पता होता। यदि इसी तरह से चलता रहा तो छात्रों का देश की शिक्षा व्यवस्था से भरोसा ही उठ जाएगा।