विदेश में शादी पर PM मोदी का संदेश क्यों? 7.8% GDP के बीच ‘Wed in India’ पर जोर, जानिए पूरी वजह
नई दिल्ली (विनय शर्मा): भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर दर्ज की है। इसी आर्थिक तस्वीर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी, स्थानीय उत्पादों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील की है। मंगलवार को जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश यात्रा और विदेशों में होने वाली शादियों को लेकर भी खास आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शादी जैसे बड़े आयोजनों के लिए विदेशी जमीन का रुख करने के बजाय भारत में ही आयोजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ‘Swadeshi’ और ‘Vocal for Local’ को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर घूमने के लिए जाना हो तो देश के भीतर ही पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दी जाए। इसी तरह विदेश में शादी करने के बजाय ‘Wed in India’ के विचार को अपनाने की जरूरत है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि जरूरत न होने पर सोना खरीदने से भी बचना चाहिए।
विदेश में शादियां, भारत से बाहर जा रहा बड़ा खर्च
भारतीयों के बीच विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग का आकर्षण लगातार बढ़ा है। अब यह चलन केवल चुनिंदा बेहद अमीर परिवारों तक सीमित नहीं माना जाता। WedMeGood की Destination Wedding Report 2026 के मुताबिक, 2025 में सर्वे में शामिल हर चार में से लगभग एक शादी डेस्टिनेशन वेडिंग थी। इनमें भारत के भीतर और विदेशों में आयोजित होने वाली दोनों तरह की शादियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसत बजट करीब 58 लाख रुपये रहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन वेडिंग पर औसतन करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च हुए। यानी विदेश में शादी करने पर भारतीय परिवारों का खर्च काफी अधिक हो सकता है।
विदेशी डेस्टिनेशन में थाइलैंड भारतीयों की सबसे पसंदीदा पसंद बना हुआ है। वहीं श्रीलंका ने 2025 में भारतीय डेस्टिनेशन वेडिंग बाजार में अपनी लोकप्रियता में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। रिपोर्ट में श्रीलंका को तेजी से उभरते विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर बताया गया है।
विदेश में शादी का एक और संकेत: ट्रैवल इंश्योरेंस
विदेश में होने वाली भारतीय शादियों की बढ़ती गतिविधि का एक संकेत ट्रैवल इंश्योरेंस के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। Policybazaar के 2023 से 2025 YTD डेटा के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शादियों से जुड़े ट्रैवल इंश्योरेंस की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।
थाइलैंड, UAE, वियतनाम और श्रीलंका भारतीयों के प्रमुख विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन में शामिल रहे हैं। वहीं इटली, स्पेन और ग्रीस जैसे यूरोपीय देशों को अपेक्षाकृत ज्यादा लक्जरी और छोटे समूहों वाले समारोहों के लिए पसंद किया गया।
हालांकि, विदेशों में हर साल होने वाली भारतीय शादियों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उद्योग से जुड़े अनुमान और निजी रिपोर्ट ही इस ट्रेंड की तस्वीर पेश करते हैं।
7.8% GDP ग्रोथ के बीच PM मोदी का जोर
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे वक्त आया है जब भारत ने अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि दर्ज की। यह आंकड़ा उम्मीदों से बेहतर रहा है और वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि दुनिया युद्ध, संकट और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं जैसी परिस्थितियों से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस प्रदर्शन को देशवासियों की मेहनत, संकल्प और सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में निराशा और गलत सूचनाओं का माहौल बनाने की कोशिशों के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। उन्होंने इस गति को आगे भी बनाए रखने की जरूरत बताई।
‘स्वदेशी’ से लेकर ‘Wed in India’ तक, क्यों दिया जा रहा है जोर?
PM मोदी ने आर्थिक विकास को घरेलू खपत और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उनका तर्क है कि देश के भीतर होने वाला खर्च घरेलू कारोबार, पर्यटन, होटल, आयोजन उद्योग और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देता है।
इसी सोच के तहत उन्होंने विदेश में शादी करने के बजाय भारत में ही शादी करने की बात कही। उनका संदेश सिर्फ शादी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अनावश्यक विदेशी यात्रा से बचने और जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की भी अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जितना ज्यादा जोर होगा, भारत उतनी तेजी से मजबूत बनेगा। उनका लक्ष्य है कि आज की मेहनत के जरिए 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना साकार किया जा सके और देश की युवा पीढ़ी को एक मजबूत अर्थव्यवस्था सौंपी जा सके।