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विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मिले कांग्रेस के 5 विधायक कांग्रेस में मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले छिंदवाड़ा की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से जिले के पांच कांग्रेस विधायकों की सामूहिक मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि विधायक इसे विकास कार्यों से जुड़ी सामान्य मुलाकात बता रहे हैं

मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच छिंदवाड़ा में शनिवार को हुई एक मुलाकात ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से जिले के पांचों कांग्रेस विधायकों की सामूहिक मुलाकात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

बता दें, इस बीत चौरई विधायक सुजीत चौधरी, सौसर विधायक विजय चौरे, परासिया विधायक सोहन वाल्मीक, पांढुर्ना विधायक नीलेश उइके मुलाकात में शामिल रहे। गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक इसे अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास और वित्तीय संसाधनों की मांग से जुड़ा सामान्य शिष्टाचार भेंट बता रहे हों, लेकिन राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

क्या कांग्रेस के लिए चिंता पैदा कर रही ये मुलाकात?

प्रदेश में जून माह में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान होना है। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे समय में विपक्षी विधायकों का विधानसभा अध्यक्ष से एक साथ मिलना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों कि माने तो यह मुलाकात कांग्रेस के लिए चिंता पैदा करने वाली है।

पेंच रिसॉर्ट की बैठक के बाद फिर एक साथ दिखे कांग्रेस विधायक

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस विधायकों की गतिविधियां लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में जिले के कांग्रेस विधायक पेंच क्षेत्र के एक रिसॉर्ट में भी एकत्रित हुए थे। उस बैठक को लेकर भी राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं चली थीं। अब विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात ने उन चर्चाओं को और बल दे दिया है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रत्येक विधायक का वोट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी भी सामूहिक बैठक या राजनीतिक मुलाकात को केवल औपचारिक कार्यक्रम मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से चुनावी रणनीति से जुड़े संकेत सार्वजनिक रूप से नहीं दिए गए हैं।

 

विकास निधि को लेकर जताई नाराजगी

सर्किट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विधायकों का कहना था कि भाजपा विधायकों को विशेष विकास कार्यों के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई गई है, जबकि विपक्षी क्षेत्रों को ऐसी सुविधा नहीं मिल रही।

 

विधायकों ने तर्क दिया कि जनता ने उन्हें भी समान अधिकारों के साथ चुनकर विधानसभा भेजा है, इसलिए विकास योजनाओं में राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे इस विषय में सरकार और संबंधित विभागों से चर्चा कर कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों के लिए भी पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने का प्रयास करें।

जनता के विकास का मुद्दा या राजनीतिक संदेश?

मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इसी बात को लेकर है कि क्या यह केवल विकास निधि की मांग थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। विपक्ष का कहना है कि जनता के विकास से जुड़े मुद्दे उठाना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है। वहीं भाजपा खेमे के कुछ नेताओं का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के समय होने वाली हर राजनीतिक गतिविधि का अपना महत्व होता है।

हालांकि कांग्रेस विधायकों ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकता अपने क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है। उनका कहना है कि मुलाकात पूरी तरह विकास केंद्रित थी और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

 

सर्किट हाउस में दिखी सत्ता और प्रशासन की मौजूदगी

विधानसभा अध्यक्ष के दौरे के दौरान सर्किट हाउस में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां पूरे दिन जारी रहीं। भाजपा संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि वहां मौजूद रहे। इसके अलावा प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अपर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस दौरान जिले के विकास कार्यों, प्रशासनिक योजनाओं और जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। हालांकि सबसे अधिक ध्यान कांग्रेस विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष की मुलाकात पर ही केंद्रित रहा।

 

राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही प्रदेश में नेताओं की बैठकों, दौरों और संपर्क अभियानों में तेजी आएगी। छिंदवाड़ा लंबे समय से प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, इसलिए यहां होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर सभी दलों की नजर बनी रहती है। फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष और कांग्रेस विधायकों की मुलाकात को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यदि इसी तरह की और राजनीतिक गतिविधियां सामने आती हैं, तो राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति और अधिक रोचक हो सकती है।

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