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आईएएस अधिकारी का इस्तीफा

यूपी काडर के वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने इस सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें करीब आठ महीने पहले राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया था, जहां रिंकू सिंह राही के त्यागपत्र के अनुसार उनके पास कोई विशेष काम नहीं है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति के साथ-साथ केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और उत्तर प्रदेश के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को भी भेजा है। साथ ही उन्हें अपनी पूर्ववर्ती समाज कल्याण विभाग की सेवा में वापस भेजे जाने का भी अनुरोध किया है।रिंकू सिंह राही को आईएएस की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद 24 जुलाई 2025 को शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनाती दी गई थी। वहां अधिवक्ताओं के आंदोलन के दौरान शौचालयों की खराब स्थिति के लिए उन्होंने स्वयं का न सिर्फ उत्तरदायित्व स्वीकार किया, बल्कि मौके पर ही उठा-बैठक भी लगाई। यह वीडियो वायरल होने पर उन्हें 30 जुलाई 2025 को राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया।राही ने त्यागपत्र में लिखा है कि उन्होंने शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान आमजन को बिना सूचना दिए तालाबों की नीलामी पर रोक लगाने और कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के प्रयास किए। लेकिन, प्रभावी दायित्वों से वंचित कर संबद्ध स्थिति में रखा जाना यह संकेत देता है कि ऐसी कार्यशैली व्यवहारिक स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। संबद्धता के बजाय समुचित रूप से दंडित किया जाना उचित होता।इतना ही नहीं राही ने राजस्व परिषद में बिना कार्य के वेतन ग्रहण न करने का अनुरोध पत्र भी उच्चाधिकारियों को भेजा था। इसके बाद आवंटित सीमित कार्य के लिए भी उन्हें प्रोग्रामर उपलब्ध नहीं कराया गया। आय प्रमाणपत्र से संबंधित शासनादेशों में विरोधाभास और ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में सेवा वर्ग के स्पष्ट उल्लेख के अभाव जैसे आवश्यक सुधारों के संबंध में भी पत्रावलियां प्रारंभ नहीं की गईं।रिंकू सिंह राही ने 7 पेज के अपने त्यागपत्र में यह भी लिखा है कि उन्होंने उच्चाधिकारियों से समुचित कार्य दायित्व सौंपे जाने का अनुरोध किया, जो अब तक लंबित है। इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी स्पष्ट कार्यदायित्व के केवल संबद्ध रखा जाना अत्यंत असामान्य प्रतीत होता है। साथ ही भविष्य में पेशेगत एवं प्रशासनिक प्रभावों को लेकर ठोस आशंकाएं पैदा करता है। संभवत: अन्य किसी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को इस प्रकार का अनुभव प्राप्त नहीं हुआ होगा।आईएएस की सेवा में आने से पहले रिंकू सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे। वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में कार्यभार ग्रहण करने के चौथे महीने मार्च में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन पर प्राणघातक हमला किया गया। इस हमले के कारण वे स्थायी दिव्यांगता की श्रेणी में आए और इसी श्रेणी में उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की। रिंकू सिंह अपने त्यागपत्र में लिखते हैं कि दिव्यांग श्रेणी का लाभ स्वीकार करना उनके लिए कोई व्यक्तिगत सुविधा नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रसेवा का अवसर प्राप्त करने का एक माध्यम मात्र था।रिंकू सिंह राही का कहना है कि प्राप्त वेतन, सुविधाओं एवं सम्मान के अनुपात में उनका वास्तविक योगदान अत्यंत सीमित रह जाना एक गंभीर नैतिक द्वंद्व पैदा करता है। जहां भी कार्य करने के अवसर उपलब्ध होते हैं, वहां स्थापित कुप्रथाओं का सुदृढ़ तंत्र है। यह तंत्र शासनादेशों को उनकी वास्तविक मंशा के अनुरूप लागू करने के प्रयासों में बाधाओं को जन्म देता है। निष्पक्ष सुनवाई के अभाव में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।राही ने लिखा है कि व्यवहारिक स्तर पर ऐसी अनेक कुव्यवस्थाएं प्रचलित हैं, जो औपचारिक रूप से स्वीकार्य न होते हुए भी कार्यप्रणाली का अंग बन चुकी हैं। वरिष्ठ स्तर से यह भी संकेत दिए गए कि सांविधानिक मूल्यों से समझौता किए बिना वर्तमान व्यवस्था में उत्तरजीविता (सर्वाइवल) लगभग असंभव है।राही अपने त्यागपत्र में लिखते हैं कि समस्या मूलत: सांविधानिक प्रणाली में नहीं, बल्कि उस व्यवहारिक कुतंत्र में है, जो समानांतर रूप से विकसित होकर सांविधानिक मंशा के प्रतिकूल संचालित होने लगा है। कोई आईएएस अधिकारी संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करता है, तो स्थापित समानांतर कुतंत्र के हितधारक संगठित रूप से विरोध करते हैं। उस आईएएस को सीधे हटाने के बजाय उसे संबद्ध, प्रतीक्षारत या सृजित बिना दायित्वों वाले पर तैनात किया जाता है। भ्रष्ट तत्वों को अपेक्षाकृत कम दंड देकर बचाव किया जाता है, जबकि ईमानदार आईएएस अधिकारियों को बिना दायित्व या सीमित भूमिका में रखा जाता है।रिंकू सिंह राही ने अपने त्यागपत्र को तकनीकी त्यागपत्र की संज्ञा देते हुए लिखा है कि यह न तो स्वेच्छा से है और न ही चुनौतियों के भयवश, बल्कि यह उस कार्यशैली का परिणाम है, जो सेवा के आरंभिक चरण में ही समुचित कार्यदायित्व से वंचित किए जाने की स्थिति से पैदा हुई है। इसमें वेतन एवं सुविधाएं तो प्राप्त होती रहेंगी, लेकिन वास्तविक सेवा के अवसर सीमित, नगण्य और अनुपलब्ध रहेंगे। आईएएस की तुलना में उनकी पूर्व की सेवा में प्रतीकात्मक दंडात्मक तैनाती वाले पद अपेक्षाकृत कम सृजित किए गए हैं। इसलिए मेरा त्यागपत्र स्वीकार कर मुझे पूर्ववर्ती सेवा में भेजे जाने की अनुमति देने की कृपा करें। ताकि, बिना कार्यदायित्व की संबद्धता एवं दंड का केवल प्रतीकात्मक तैनाती तक सीमित रहना, दोनों का अंत हो सके।आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर ने उनके गृह जनपद अलीगढ़ में हलचल पैदा कर दी है। इससे परिजन स्तब्ध हैं। अलीगढ़ के नौरंगाबाद डोरी नगर स्थित उनके आवास पर जब इस्तीफे की सूचना पहुंची, तो परिवार के सदस्य भावुक और निराश हो गए। पिता सौदान सिंह राही का कहना है कि रिंकू ने सदैव ईमानदारी की राह चुनी, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें वह सम्मान और स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।पिता ने बताया कि रिंकू ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर रुख अपनाए रखा। उन्होंने साझा किया कि रिंकू को कई बार करोड़ों रुपयों के प्रलोभन दिए गए, लोग पैसे लेकर घर तक आए, लेकिन उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी इस लड़ाई के कारण उन पर जानलेवा हमला भी हुआ, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं और एक आंख की रोशनी भी प्रभावित हुई, इसके बावजूद वे अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहे।











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