यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों के आठवीं कक्षा तक के बच्चों को मुफ्त दूध दिया जाएगा। इसके लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस योजनांतर्गत आगामी पांच वर्षों में 6 हजार 600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। वहीं, विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 10 हजार 428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
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ज्ञान से ‘ज्ञानी’ की ओर बढ़ी मोहन सरकार- 2026-27 का 4.38 लाख करोड़ के बजट में कोई नया कर नहीं
मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के साथ अब उद्योग व इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस बढ़ाया है। लाड़ली बहना, मुफ्त दूध योजना और द्वारका जैसी घोषणाओं के साथ सरकार ने विकास और जनकल्याण के संतुलन का संदेश दिया है।वर्ष 2026-26 के बजट में राजस्व आधिक्य यानी सकल आय और सकल खर्च के बाद 44 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में शेष रहने का अनुमान है। सरकार की अनुमानित राजस्व प्राप्तियां 3,89,397 करोड़ है, जिसमें से राज्य के स्वयं के कर कर की राशि 1,17,667 करोड़, केंद्रीय करों से प्रदेश का हिस्सा 1,12,137 करोड़, कर के अतिरिक्त राजस्व 24,394 करोड़ तथा अनुदान सहायता 54,505 करोड़ रुपये शामिल हैं। सरकार आने वाले चार से पांच वर्षों में बजट का आकार दोगुना करने की बात करती है। इस बार तीन वर्षीय रोलिंग बजट अपनाते हुए वार्षिक बजट को दीर्घकालिक दृष्टि से जोड़ा गया है।
सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसमें समृद्ध किसान, सशक्त राज्य के आधार पर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के दृष्टिगत 1,15,013 करोड़ अन्य वित्तीय संसाधनों समेत का प्रावधान बजट में किया गया है। इसमें कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता वृद्धि के लिए 28 हजार 158 करोड़, आदान व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए 64 हजार 995 करोड़ रुपये, उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए 8 हजार 91 करोड़ रुपए, सुरक्षा चक्र के लिए 13 हजार 769 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 80,266 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यदि इसमें अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (EBR) को भी शामिल कर लिया जाए, तो प्रभावी पूंजीगत व्यय 1,06,156 करोड़ तक पहुंच जाता है। यह दर्शाता है कि सरकार सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण पर विशेष ध्यान दे रही है। पिछले वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय 74,662 करोड़ रुपए था। शहरों में अधोसंरचना विकास के लिए द्वारका योजना में आगामी तीन वर्षों में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश संभावित है।
ग्रामीण क्षेत्र में आबादी भूमि पर मालिकाना अधिकार की योजना है, जिसमें मुद्रांक एवं पंजीयन का समस्त शुल्क राज्य सरकार वहन करेगी। इसके लिए 3800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मजरा-टोला सड़क योजना के लिए 21 हजार 630 करोड़ की स्वीकृति के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 800 करोड़ का प्रावधान किया है। राज्य के क्षतिग्रस्त पुलों का पुर्ननिर्माण योजना में 4 हजार 572 करोड़ की स्वीकृति के बाद इस वर्ष 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।