चांदी टूटी, सोना भी पस्त; वैश्विक संकेतों और छुट्टियों से सर्राफा बाजार बेदम
कमजोर वैश्विक संकेतों और सुस्त मांग के चलते राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ गई। सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें चांदी 2 प्रतिशत तक लुढ़क गई। विश्लेषकों के अनुसार, एशियाई बाजारों में छुट्टियों के कारण कम तरलता और भू-राजनीतिक घटनाओं से पहले निवेशकों की सतर्कता ने बाजार को प्रभावित किया है।ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को चांदी की कीमत 5,000 रुपये यानी 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। इससे पहले सोमवार को यह 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। सोने की कीमतों में भी भारी दबाव देखा गया। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 2,200 रुपये (1.4 प्रतिशत) गिरकर 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो पिछले सत्र में 1,59,200 रुपये पर बंद हुआ था।
चीन में छुट्टियां और वैश्विक दबाव बना कारण
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट का एक मुख्य कारण चीन में 'लूनर न्यू ईयर' की छुट्टियां हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने बताया कि चीन, जो सोने का एक प्रमुख उपभोक्ता है, वहां छुट्टियों की वजह से भागीदारी नदारद रही। इससे खरीदारी की दिलचस्पी कम हुई और कीमतों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,000 डॉलर के स्तर को बनाए रखने में विफल रहा और 1.04 प्रतिशत गिरकर 4,938.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी 2.15 प्रतिशत गिरकर 74.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
अमेरिका-ईरान वार्ता और आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की नजर
मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, जिनेवा में मंगलवार से शुरू हो रही अमेरिका-ईरान बातचीत से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है, जिससे सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, च्वाइस ब्रोकिंग की कावेरी मोरे ने बताया कि अमेरिका के नरम मुद्रास्फीति आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को हवा दी है, जिसका असर भी बाजार पर दिख रहा है।
सीमित दायरे में कारोबार की उम्मीद
बाजार का रुख अब आगामी आर्थिक डेटा और भू-राजनीतिक विकास पर निर्भर करेगा। सौमिल गांधी ने कहा कि बाजार सहभागियों का ध्यान अब अमेरिकी एडीपी रोजगार रिपोर्ट और रूस-यूक्रेन के बीच अमेरिका के नेतृत्व वाली बातचीत पर है। इन घटनाओं के परिणाम जोखिम धारणा और सुरक्षित निवेश की मांग को प्रभावित करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक सट्टा धारणा निर्णायक रूप से वापस नहीं आती, निकट भविष्य में कीमतें सीमित दायरे में रहने की संभावना है।