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इन चेहरों की जीत से तय होगी बीजेपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया की ताकत! कइयों की डोल रही कुर्सी

ग्वालियर: एमपी विधानसभा चुनाव के नतीजों से न सिर्फ प्रदेश की सरकार तय होगी बल्कि कई दिग्गज नेताओं की ताकत भी निर्धारित करेगी। इनमें सबसे महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। अपने समर्थक विधायकों की संख्या की वजह से कांग्रेस दहाड़ते रहते थे। उनकी नहीं सुनी गई तो उन्होंने कांग्रेस की सरकार गिरा दी थी। उनके विधायकों की वजह से ही एमपी में फिर से बीजेपी की सरकार बनी है। इस बार उनके अधिकांश वफादार चुनावी मैदान में हैं। उन्हें अगर जीत मिलती है तो ज्योतिरादित्य सिंधिय की ताकत बीजेपी में बरकार रहेगी। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं।

यही वजह है कि अपने समर्थकों की जीत पक्की करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। ग्वालियर-चंबल अंचल में उन्होंने इस बार धुआंधार प्रचार किया है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के नतीजे ही पार्टी में उनकी धाक तय करेगी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में आने वाले अधिकांश बड़े चेहरों को टिकट मिल गया है। इनकी जीत पर ही महाराज का भविष्य निर्भर है।

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो एमपी विधानसभा चुनाव 2023 केंद्रीय मंत्री सिंधिया के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। उनका आगे का सफर बीजेपी में कैसा रहेगा, यह उनके समर्थकों की जीत पर निर्भर है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आने वाले उनके बड़े समर्थकों में सांवेर से तुलसी सिलावट, ग्वालियर से प्रद्युमन सिंह तोमर, सुरखी से गोविंद सिंह राजपूत, डबरा से इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, सुरेश राठखेड़ा, प्रभुराम चौधरी, मनोज चौधरी को हाटपिपल्या, हरदीप सिंह डंग को सुवासरा, बृजेन्द्र सिंह यादव को मुंगावली, बिसाहूलाल सिंह को अनूपपुर, कमलेश जाटव को अम्बाह, रघुराज कंसाना को मुरैना, ऐंदल सिंह कंसाना को सुमावली और जजपाल सिंह जज्जी समेत ऐसे कई चेहरे हैं, जिनकी जीत सिंधिया के लिए जरूरी है।

सिंधिया परिवार से जुड़े रहे हैं गोविंद सिंह राजपूत

दरअसल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया ने जब कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाई थी। उस समय सागर में नई पार्टी का झंडा उठाने वाले सबसे पहले व्यक्ति गोविंद सिंह राजपूत थे। तभी से गोविंद सिंह राजपूत को ग्वालियर राजघराने का बेहद करीबी माना जाता है। तभी से ना तो गोविंद सिंह राजपूत ने सिंधिया परिवार को छोड़ा और ना ही सिंधिया परिवार ने। ऐसा ही जुड़ाव ज्योतिरादित्य सिंधिया का तुलसी सिलावट, प्रभु राम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, इमरती देवी और प्रद्युमन सिंह तोमर से भी माना जाता है।

इन पर है सबकी नजर

वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2018 में बनी कांग्रेस की सरकार को 2020 में ठोकर मार दी थी। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उनके साथ उनकी पूरी पलटन भी बीजेपी में शामिल हो गई थी। प्रदेश में हुए उपचुनाव में उनके 16 समर्थकों को जीत मिल गई थी। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद बीजेपी में काफी बढ़ गया था।

सिंधिया के बढ़ते कद से अभी तक बीजेपी में पुराने भाजपाई परेशान रहे हैं। नेतृत्व की वजह से पुराने भाजपाइयों के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी तालमेल बिठाकर चलते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनावी रैलियों में मंच से ज्योतिरादित्य सिंधिया को बढ़ावा देते रहे हैं। आगे यह तभी बरकार रहेगा, जब उनके वफादारों की जीत होगी।

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