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सपा में सुलह की कोशिशें नाकाम, चुनाव आयोग पहुंचे अखिलेश गुट के नेता

बाप-बेटों के बीच बंट चुकी समाजवादी पार्टी की लड़ाई अब साइकिल के लिए है. साइकिल की सवारी कौन करेगा? अखिलेश करेंगे या मुलायम सिंह यादव साइकिल पर अपना कब्जा जमाएंगे? इसी सवाल के बीच आज अखिलेश खेमा साइकिल चुनाव चिन्ह पर दावा ठोकेगा. सोमवार को मुलायम खेमा साइकिल पर कब्जा जमाने के लिए चुनाव आयोग पहुंचा. लेकिन इस बीच पिता और पुत्र के बीच सुलह की भी कोशिश की जा रही है और ये जिम्मा उठाया है आजम खान ने. सुलह का फॉर्मूला लेकर आजम खान दिल्ली पहुंच गए हैं, लेकिन मुलायम आजम से बिना मिले लखनऊ रवाना हो गए.

इस बीच अखिलेश गुट के नरेश अग्रवाल ने कहा है कि हमारी तरफ से सुलह की कोशिश नहीं होगी. अधिवेशन में जो भी प्रस्ताव पास हुए वो हम चुनाव आयोग के सामने रखेंगे. सभी कार्यकर्ता अखिलेश के साथ हैं. अखिलेश हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वह आज चुनाव आयोग जाएंगे और बताएंगे कि समाजवादी पार्टी और साइकिल हमारी है और हमें मिलनी चाहिए.

अखिलेश गुट ये रखेगा पक्ष
अखिलेश गुट चुनाव आयोग पहुंच गया है. रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरनमय नंदा चुनाव आयोग पहुंच गए हैं. रामगोपाल चुनाव आयोग के समाने साइकल चिह्न पर हक जताएगा. रामगोपाल कहेंगे कि मुलायम हमारे संग्रक्षक हैं, हमारे आदर्श हैं. अखिलेश हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. समाजवादी पार्टी हमारी है, साइकिल का चिह्न हमारा है. कोई सुलह की बात नहीं है. कोई दूसरी पार्टी का चिह्न नहीं लेंगे क्योंकि 90 प्रतिशत लोग अखिलेश के साथ हैं और नेताजी में हमारी आस्था है.

किरनमय नंदा ने किया नया खुलासा
इस बीच मुलायम सिंह द्वारा समाजवादी पार्टी से निकाले गए पुराने भरोसेमंद किरनमय नंदा ने आरोप लगाया है कि 1 जनवरी को जारी दो पत्रों में मुलायम सिंह यादव के दस्तखत अलग-अलग हैं. इस बयान के बाद साइन को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. गौरतलब है कि 1 जनवरी को अखिलेश गुट ने लखनऊ में अधिवेशन कर अखिलेश यादव को सपा अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक बताते हुए दो नेताओं किरनमय नंदा और नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकालने का आदेश जारी किया था और कहा था कि सपा के अध्यक्ष अभी मुलायम सिंह ही हैं. अब किरनमय नंदा के इस बयान से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत
मुलायम सिंह यादव के करीबी सूत्र ने बताया है कि चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत है, क्योंकि पार्टी से बाहर के सदस्यों द्वारा अधिवेशन बुलाना असंवैधानिक है. सिर्फ पार्टी अध्यक्ष ही अधिवेशन बुला सकता है. अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को एसपी में वापस लेने का निर्णय किसी पेपर पर नहीं लिया गया था. उनका निलंबन वापस लिया जा सकता था, लेकिन उन्होंने अधिवेशन बुला लिया.

चुनाव आयोग से मिले मुलायम
इससे पहले सोमवार दोपहर मुलायम सिंह के दिल्ली वाले आवास पर करीब 2 घंटे तक अखिलेश विरोधी गुट के नेताओं की बैठक चली, जिसमें खुद मुलायम सिंह , शिवपाल यादव, अमर सिंह, जयाप्रदा और अंबिका चौधरी शामिल हुए. बैठक के बाद मुलायम, शिवपाल, अमर सिंह और जया प्रदा चुनाव आयोग में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे. चुनाव आयोग को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी में हुए ताजा राजनीतिक घटनाक्रम की जानकार दी. सूत्रों के मुताबिक मुलायम ने आयोग को बताया कि दूसरे खेमे की राजनीतिक कार्यवाही पार्टी संविधान के खिलाफ है और जो रामगोपाल ने अधिवेशन बुलाया वो असंवैधानिक है, क्योंकि रामगोपाल और अखिलेश यादव को पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका है. आयोग के सामने मुलायम ने 'साइकिल' चुनाव चिन्ह पर भी अपना हक जताया.

'अखिलेश खुद में बड़े ब्रांड'
पार्टी सिंबल को लेकर जारी विवाद में अखिलेश के समर्थक एमएलसी उदयवीर सिंह ने कहा कि हम अखिलेश के नाम पर चुनाव लड़ेंगे. उदयवीर ने कहा कि अखिलेश खुद में ब्रांड हैं. उदयवीर ने हालांकि उम्मीद जताई कि नेताजी समझाने पर मान जाएंगे.

मेरे साथ नेताजी के भी नारे लगाएं
इस बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी अपने करीबी विधायकों और नेताओं के साथ मुलाकात की. बैठक में उनसे कहा कि वे चुनाव की तैयारी करें. अखिलेश ने कहा कि हम और नेताजी एक ही हैं. आप हमारे नारे लगाते हैं तो उनके भी लगाएं. आप लोग उनसे भी मिलें. अखिलेश मंगलवार को एक बार फिर कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे.

मैं पूरी तरह से फिट
दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले मुलायम ने कहा कि मैं पूरी तरह से फिट हूं. मीडिया ने मेरा हमेशा साथ दिया, मैंने कोई भ्रष्टाचार या गलत काम नहीं किया है. आरोप लगा तो सुप्रीम कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी मेरी है और इसका चुनाव चिह्न भी मेरा है.

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