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सिंधिया परिवार से अलविदा बोलते जा रहे उनके ही विश्वासपात्र, क्यों?

ग्वालियर चंबल अंचल एक ऐसा क्षेत्र है जहां से राजनीति अपनी अंगडाई लेती है। सिंधिया महल से पहले कांग्रेस की राजनीति शुरू होती थी और अब भाजपा की राजनीति चल रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले राजमहल के वफादार अब सिंधिया परिवार को अलविदा कहने लगे है। विधानसभा चुनाव में टिकट के लालच में उनके ही विश्वासपात्र अब फिर से कांग्रेस का रूख करने लगे है। हाल ही में कांग्रेस ने शिवपुरी जिले के भाजपा नेताओं में सेंधमारी की है। यू कहे तो अब कांग्रेस चुन-चुन कर राजमहल के कंगूरे झटक रही है।

 

सिंधिया के चार विश्वासपात्रों ने थामा कांग्रेस का दामन

 

गुना-शिवपुरी से सांसद रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के चार कट्टर समर्थकों ने कांग्रेस का दामन थाम कर शाही परिवार से बगावत की चिंगारी सुलगा दी है। यह वही नेता है जो सिंधिया परिवार के साथ हर वक्त खड़े रहते थे। आज वही नेताओं का कहना है कि उन्हें भाजपा में सम्मान नहीं मिला, भला ये तो बाते है, बात तो कुछ और है। शिवपुरी के राजनीतिक जानकारों की माने तो कांग्रेस का प्रयास है कि सिंधिया परिवार के करीबियों को अपने पाले में लाया जाए।

 

दो माह में गिरे चार विकेट

 

आपको बता दें कि कांग्रेस ने सिंधिया परिवार के दो माह में 4 विकेट गिरा चुकी है। पहले तो बैजनाथ सिंह यादव जो की कोलारस विधानसभा क्षेत्र से आते है। उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद राकेश गुप्ता जो शिवपुरी के ही हैं। वह भी कांग्रेस में शामिल हो चुके है। इसके बाद रघुराज धाकड़ जो कोलारस विधानसभा के दिग्गज नेता माने जाते है। वह भी अब कांग्रेस के पाले में है।इसके बाद जितेंद्र जैन गोटू ने हाल ही में कांग्रेस का दामन थाम लिया। गोटू का कांग्रेस में जाना सिंधिया परिवार के लिए बड़ा झटका है।

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