सिंधिया के लिए साधी चुप्पी : पुराने रिश्तों की कद्र या भविष्य की राजनीति
ग्वालियर (विनय शर्मा) : वही हुआ, जिसकी संभावना जताई जा रही थी। एक दिन के दौरे पर ग्वालियर आईं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सीधा हमला नहीं किया। प्रियंका ने बस इतना ही कहा कि कुछ लोगों की विचारधारा अचानक बदल गई। उन्होंने यह भी कहा कि वे दस मिनट तक सिंधिया के बारे में बोल सकती हैं, लेकिन कहा कुछ नहीं। गांधी और सिंधिया परिवार के पुराने रिश्ते रहे हैं। ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया और प्रियंका के पिता राजीव गांधी करीबी मित्र थे। ज्योतिरादित्य भी जब तक कांग्रेस में थे, प्रियंका के बेहद करीब थे। राशिद किदवई ने अपनी किताब द हाउस ऑफ सिंधियाज में लिखा है कि ज्योतिरादित्य को प्रियंका अपने भाई जैसा मानती थीं। सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद से सियासत पूरी तरह बदल गई, लेकिन प्रियंका ने इसे रिश्तों पर हावी नहीं होने दिया। अब सवाल यह है कि प्रियंका ने पुराने रिश्तों का मान रखा या भविष्य के संबंधों की नींव रखी। प्रियंका ने ग्वालियर के मेला मैदान में 3५ मिनट के भाषण में मणिपुर से लेकर महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी तक सबकी चर्चा की। सिंधिया पर कोई बात नहीं की।