"राषà¥à¤Ÿà¥à¤° सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿" विचारकों à¤à¤µà¤‚ करà¥à¤®à¤¶à¥€à¤²à¥‹à¤‚ के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ विमरà¥à¤¶ लोक-मंथन 2016 का लोकामृत
à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² :
तà¥à¤°à¤¿à¤¦à¤¿à¤µà¤¸à¥€à¤¯ लोक-मंथन में 'राषà¥à¤Ÿà¥à¤° सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿' के à¤à¤¾à¤µ पर देश-काल-सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के संदरà¥à¤ में विमरà¥à¤¶ में देश-विदेश के विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚, विचारकों और करà¥à¤®à¤¶à¥€à¤²à¥‹à¤‚ की सहà¤à¤¾à¤—िता रही। समाज जीवन पर औपनिवेशिकता के कà¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ का गहरा विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ हà¥à¤†à¥¤ सामूहिक मंथन से निकले नवनीत के आधार पर समसà¥à¤¤ लोकहित के लिये राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨ के लिठहम सब समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤, विमरà¥à¤¶ का निषà¥à¤•रà¥à¤· रहा।
मंथन में यह तथà¥à¤¯ रेखांकित हà¥à¤† कि अनेक जà¥à¤žà¤¾à¤¤-अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ करà¥à¤®à¤¶à¥€à¤² औपनिवेशक मानसिकता से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ बाहर आकर औरों को à¤à¥€ इस राषà¥à¤Ÿà¥à¤° और समाज की मूल असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾ और सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ का सही अहसास जगाने में दशकों से सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ हैं। à¤à¤¸à¥‡ सराहनीय à¤à¤µà¤‚ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ लोक पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के कारण à¤à¤¾à¤°à¤¤ की आतà¥à¤®à¤¾ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¤¾à¤—ृत हो रही है। इस राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¤¾à¤—रण की बेला में समाज की अनà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤¯ असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾à¤“ं का कà¥à¤› ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपनी सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ साधना के लिठदà¥à¤°à¥‚पयोग किया जा रहा है। मंथन में यह उà¤à¤°à¤•र सामने आया कि इस चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ को सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर à¤à¤• राषà¥à¤Ÿà¥à¤°-à¤à¤• जन का मंतà¥à¤° जगाते हà¥à¤, वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾ को सà¥à¤¦à¥ƒà¥ करना à¤à¤• राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ करà¥à¤¤à¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ है। लोक-मंथन विमरà¥à¤¶ का यह सà¥à¤µà¤¿à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ मत रहा कि समाज जीवन में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ समानांतर असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾à¤“ं का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। इन सà¤à¥€ असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾à¤“ं का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ विकास होकर, वे राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के समगà¥à¤° उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨ में अपनी महती à¤à¥‚मिका का निरà¥à¤µà¤¹à¤¨ करें, यह à¤à¥€ अनिवारà¥à¤¯ है।
अपनी मूल वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पहचान की ओर बà¥à¤¤à¥‡ हà¥à¤ कला, साहितà¥à¤¯, नाटक, फिलà¥à¤®, शोध तथा मीडिया के माधà¥à¤¯à¤® से अपनी अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को देशज परंपराओं से जोड़ने के à¤à¥€ सराहनीय पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ हो रहे हैं। इन पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ का सà¥à¤µà¤¾à¤—त करते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अधिक सशकà¥à¤¤ और सरà¥à¤µà¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¥€ बनाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में आयी।
लोक-मंथन का लोकामृत
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à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सामाजिक, राजनीतिक, आरà¥à¤¥à¤¿à¤•-हर कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की नीति और कारà¥à¤¯ का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ जन-जीवन में राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¤à¥à¤µ का उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨ करना।
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à¤à¤¾à¤°à¤¤ की à¤à¤•ातà¥à¤®à¤¤à¤¾ सदैव रूपों में अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ होती है। यही हमारी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ की आधारशिला है।
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औपनिवेशिकवाद पर आधारित मानसिकता को राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ विचारों से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚, रूपों à¤à¤µà¤‚ आयामों में 'राषà¥à¤Ÿà¥à¤° सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿' आधारित विमरà¥à¤¶ आयोजित करना।
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सामाजिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं, आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रचनाओं à¤à¤µà¤‚ लोकतंतà¥à¤° के साधनों के देशज विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ का निरंतर अनà¥à¤µà¥‡à¤·à¤£ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨à¥¤
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विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ में शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤µà¤‚ शोध में औपनिवेशवाद के कारण हो रही हानि का आकलन à¤à¤µà¤‚ औपनिवेशिक मानसिकता से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और उपायों का समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ किया जाना।
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उपनिवेशवाद की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विपरीत देशज विचार को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने वाले साहितà¥à¤¯, कला, रचनाओं, फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚, टेलीविजन कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ सोशल मीडिया पर पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ संवाद इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ à¤à¤µà¤‚ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ करना।
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à¤à¤•ातà¥à¤®à¤¤à¤¾ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤µà¤°à¥‚पों को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ à¤à¤µà¤‚ असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾à¤“ं को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करती लोक- परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं à¤à¤µà¤‚ लोक-कलाओं का केवल संरकà¥à¤·à¤£ ही नहीं, अपितॠउनके विकास के लिठसà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ वातावरण बनाना।
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समाज की विविध असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾à¤“ं में अंतरà¥à¤¨à¤¿à¤¹à¤¿à¤¤ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ à¤à¤•ातà¥à¤®à¤¤à¤¾ को सà¥à¤¦à¥ƒà¥ करने के लोक पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ का नियोजन।
तीन दिवसीय लोक-मंथन ने पाया कि नितà¥à¤¯ नूतन-चिर पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति की आतà¥à¤®à¤¾ है। काल सà¥à¤¸à¤‚गत जीवन विकास कà¥à¤°à¤® की पोषक à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सांसà¥à¤•ृतिक परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ सदैव आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता, खà¥à¤²à¥‡à¤ªà¤¨, नव-नवीन, जà¥à¤žà¤¾à¤¨-विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ तथा नवोनà¥à¤®à¥‡à¤·à¤¶à¤¾à¤²à¤¿à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ का सà¥à¤µà¤¾à¤—त ही नहीं, समावेश करती रही है। इस गौरवपूरà¥à¤£ धरोहर को देश-काल-सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के अनà¥à¤°à¥‚प अपने वैयकà¥à¤¤à¤¿à¤•, सामाजिक à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• जीवन में समृदà¥à¤§ करते रहने को 'राषà¥à¤Ÿà¥à¤° सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿' विचारक और करà¥à¤®à¤¶à¥€à¤² अपना पवितà¥à¤° करà¥à¤¤à¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ मानते हैं।