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ट्रेन को गिराने की साजिश थी फ‍िर क्या हुआ

ग्वालियर। à¤¯à¤¹à¤¾à¤‚ से करीब 14 किलोमीटर दूर सिथौली-संदलपुर के बीच बीती रात उप्र संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को पलटाने के लिए रेलवे ट्रैक पर 300 किलो वजनी और 16.4 फीट लंबा गार्डर (ट्रैक का टुकड़ा) रख दिया गया। ट्रेन के लोको पायलट ने सामने गार्डर रखा देखा, ट्रैक के बगल में गहरी खाई थी, लेकिन वह घबराया नहीं और उसने सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए।

इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बाद भी इंजन गार्डर से टकराता हुआ निकल गया लेकिन इमरजेंसी ब्रेक लगाए जाने की वजह से गति कम हो गई, जिसके चलते बड़ा हादसा टल गया। अगर लोको पायलट ब्रेक न लगाता तो ट्रेन तेज गति में ही टकराती और डिरेल हो जाती। ट्रेन डिरेल होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना से पूरे मंडल में खलबली मची हुई है। घटना के बाद झांसी रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्रा, वरिष्ठ मंडल अभियंता अनुराग यादव जांच के लिए पहुंचे। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

माणिकपुर से चलकर हजरत निजामुद्दीन जाने वाली उप्र संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12447) झांसी से रविवार रात 11.15 बजे रवाना हुई। ट्रेन का ग्वालियर स्टॉपेज नहीं है, इसके चलते ट्रेन यहां से थू्र गुजरती है। ट्रेन रात 1 बजे संदलपुर-सिथौली के बीच डाउन ट्रैक से करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजर रही थी। किलोमीटर क्रमांक 1208 के आगे रेलवे ट्रैक काफी घुमावदार (कर्व) है।

ट्रेन के लोको पायलट डीके मीणा ने ट्रेन की गति धीमी की। ट्रेन की गति धीमी हुई और ट्रेन किलोमीटर क्रमांक 1210 के खंबा नंबर-10 से करीब 100 मीटर दूर थी। चूंकि यहां ट्रैक काफी घुमावदार है, इसलिए सामने लोको पायलट को कुछ दिखता नहीं है। इसलिए यहां बहुत ही सतर्कता से लोको पायलट ट्रेन चलाते हैं। ट्रेन करीब 100 मीटर दूर थी, तभी लोको पायलट की नजर पड़ी। लोको पायलट ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाए।

घुमाव की वजह से ट्रेन की गति धीमी थी और इमरजेंसी ब्रेक लगे तो ट्रेन गार्डर से टकराई, लेकिन इतनी तेज गति से नहीं टकराई। जिसकी वजह से हादसा टल गया। इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। लोको पायलट ने घटना होने के बाद तत्काल सिथौली स्टेशन मास्टर को सूचना दी। सूचना मिलते ही आरपीएफ-जीआरपी को सूचना दी गई।

साथ ही पीछे से आ रही ट्रेनों को रोक दिया गया। आरपीएफ-जीआरपी वहां पहुंची। इंजन क्षतिग्रस्त था तो ट्रेन को किसी तरह ग्वालियर तक लाए। ट्रेन को ग्वालियर लाने पर इंजन बदला गया और दूसरा इंजन लगाकर ट्रेन आगे के लिए रवाना हुई। इस घटना के चलते सुबह 4 बजे तक डाउन ट्रैक पर रेल यातायात बाधित रहा। अप ट्रैक से ही ट्रेनों को निकाला गया, जिसके चलते ट्रेनें विलंब से ग्वालियर पहुंचीं।

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