वृकà¥à¤· परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रखते है: डॉ. सिकरवार
पौधरोपण कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के साथ रोजा अफà¥à¤¤à¤¾à¤° हà¥à¤†
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤°à¥¤ वृकà¥à¤· जितना परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ संतà¥à¤²à¤¨ को बनाठरखने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है, उतने ही मानव जीवन के लिठजरूरी हैं। यह बात à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेता à¤à¤µà¤‚ पारà¥à¤·à¤¦ डॉ. सतीश सिंह सिकरवार ने महलगांव पहाड़ी पर आयोजित पौधरोपण कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में मà¥à¤–à¥à¤¯ अतिथि की आसंदी से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किà¤à¥¤ इस मौके पर रोजा अफà¥à¤¤à¤¾à¤° का कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® à¤à¥€ डॉ. सिकरवार शामिल हà¥à¤à¥¤
महलगांव पहाड़ी के पास सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ नई बसà¥à¤¤à¥€ में आयोजित पौधरोपण कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में मौजूद जनसमà¥à¤¦à¤¾à¤¯ को संबोधित करते हà¥à¤ à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेता डॉ. सिकरवार ने कहा कि पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बिगड़ते परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के कारण चिंतित है। खराब परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को कई बीमारियों को जनà¥à¤® देता है। इसलिठजरूरी है कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पौधे लगाठजाà¤à¤‚। उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¤‚े कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखà¤à¤¾à¤² à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तरह करना होगी, तà¤à¥€ वह पौधे में वृकà¥à¤· का रूप ले पाà¤à¤‚गे। डॉ. सिकरवार ने कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ का आवà¥à¤¹à¤¾à¤¨ किया की वह हर गली मोहलà¥à¤²à¥‡ में पौधे लगाà¤à¤‚ और उनकी सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ करें। इससे परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥à¤¸à¤¾ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रहेगा और बारिश à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ होती है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ कहा कि पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही मानव और पà¥à¤°à¤•ृति का घनिषà¥à¤ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ रहा है । à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤ वसà¥à¤¤à¥à¤° और आवास की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का समाधान à¤à¥€ इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ वनों से हà¥à¤† है । वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ से उसने मीठे फलठवृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ की छाल पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की और पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से उसने अपना शरीर ढका । उनकी लकड़ियों और पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से अपने घर की छत बनाई। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल का साहितà¥à¤¯ à¤à¥€ हमें ताड़पतà¥à¤°à¥‹à¤‚ पर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ मिलता है। पà¥à¤°à¤•ृति का सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ उपहार वन है । वनों की हरियाली के बिना मानव जीवन की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ करना वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ है। जनà¥à¤® से लेकर मृतà¥à¤¯à¥ तक इन वनों की लकड़ी ही उसके काम आती है । इन वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ से हमें शà¥à¤¦à¥à¤§ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ मिलती है। घने वनों की हरियाली देखकर मन पà¥à¤°à¤«à¥à¤²à¥à¤²à¤¿à¤¤ हो उठता है। वृकà¥à¤· सà¥à¤µà¤¯à¤‚ धूप में रहकर हमें छाया देते हैं। जब तक हरे-à¤à¤°à¥‡ रहते हैं तब तक हमें फलठसबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ देते हैं और सूखने पर ईंधन के लिठलकड़ी देते हैं। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ की हरी पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और फलों को खाकर गाय, à¤à¥ˆà¤‚स, बकरी आदि जानवर दूध देते हैं जिसमें हमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मिलता है।
डॉ. सिकरवार ने कहा कि वनों की लकड़ी से हम कागजठलाखठगोंदठखिलौनेठपà¥à¤²à¤¾à¤ˆà¤µà¥à¤¡à¤ सौनà¥à¤¦à¤°à¥à¤¯ सजà¥à¤œà¤¾ का सामानठखिड़कियांठपलंगठदरवाजे आदि बनाते है। वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ के फैलाव के सिमटने का कारण बà¥à¤¤à¥€ हà¥à¤ˆ जनसंखà¥à¤¯à¤¾ है । पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• नागरिक का करà¥à¤¤à¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ है कि वह अपने जीवन में à¤à¤• वृकà¥à¤· अवशà¥à¤¯ लगाठ। आज का सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ मानव पेड़ तो काटता गया लेकिन पेड़ लगाना à¤à¥‚ल गया। वन पृथà¥à¤µà¥€ की अमूलà¥à¤¯ धरोहर है वह मूल से लेकर शिखा तक हमारे लिठहै। उनकी रकà¥à¤·à¤¾ करना पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• नागरिक का करà¥à¤¤à¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ है । अपने और आने वाली पीà¥à¥€ के जीवन को बचाने के लिठहमें वृकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ करना ही होगा।
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में रहीश इनà¥à¤¸à¤¾à¤° अली, जावेद शाह, शाहरूख खान, सलमान खान, इरफान पठान, शिराज पठान, रूकवान पठान, सतà¥à¤¤à¤¾à¤° खान, संजू à¤à¤¾à¤ˆ, जाहिद, आसिफ खान, सà¥à¤°à¥‡à¤¶ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤ªà¤¤à¤¿, विजय बहादà¥à¤° तà¥à¤¯à¤¾à¤—ी, नरेश कौशिक, नीनूस खां, वसीम खान, कलà¥à¤²à¤¾ à¤à¤¾à¤ˆ, आसिफ खान, शाहिद खान, सलीम खान, जीतेनà¥à¤¦à¥à¤° खेमरिया आदि उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ थे।