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सत्याग्रह से आम बन गये ज्योतिरादित्य

सिंधिया रियासत के ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पुरखों की परंपरा अनुसार महाराज ही कहलाये जाते है। लेकिन अब उन्हें महाराज नहीं आप सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कहकर पुकार सकते है। इसका ऐलान खुद महाराज ने भोपाल में 72 घंटों के सत्याग्रह की समाप्ति पर मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया हूं कहकर किया।
अमूमन भाजपा उपाध्यक्ष प्रभात झा और बजरंगी नेता मंत्री जयभान सिंह पवैया के निशाने पर रहने वाले महाराज अब आम आदमी की राह पर चल निकले है। किसानों के मुददे पर बैकफुट पर चल रही कांग्रेस को सिंधिया के सत्याग्रह ने संजीवनी देकर उभारा है। सिंधिया के सत्याग्रही मंच पर सभी दिग्गजों का जमघट लगा। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उनके एमएलए बेटे जयवर्धन सिंह भी आंदोलन में आहुति देने पहुंचे। दिग्विजय ने सिंधिया की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा महाराज ने किसानों के लिए एसी और राजशाही छोड़ी। खाट पर सोए, मटके का पानी पिया और दोने पत्तल में पूडी सब्जी खाई। रातभर बिना एसी के खाट पर बैठकर किसानों की समस्याओं को सुना। असली जननायक तो वह ही है। जबकि किसान का बेटा कहने वाले मुख्यमंत्री शिवराज ने 5 करोड़ फूंककर शाही एयरकूल्ड तंबू में 27 घंटे के उपवास का नाटक किया।
उपवास की समाप्ति पर दो दिन से उपवास व राजशाही को लेकर आ रहे प्रभात और जयभान के बयानों का सिंधिया ने अपने ही शब्दों में जबाब दिया। उन्होंने कहा महाराज मैं पूर्व में था, पर आज सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया हूं। उन्होंने कहा अब इस सरकार से किसानों से लेकर हर वर्ग के लिए जमीनी लड़ाई होगी। उन्होंने इसके लिए सभी कांग्रेसजनों और समर्थकों को एकजुट होने का आव्हान किया। आम आदमी बने ज्योतिरादित्य सिंधिया अब ग्वालियर में किस अंदाज में आते है यह देखना होगा, क्योंकि यहां उनका राजशाही अंदाज ही होता है। परंतु सत्याग्रह से सत्याग्रही महाराज, मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया हूं बनकर निकले है।

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