समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ जगत के लिये है जैन समाज की सह असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ – शà¥à¤°à¥€ पवैया
उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ दिगमà¥à¤¬à¤° जैन समाज के मेले में शामिल हà¥à¤
जैन धरà¥à¤® में निहित सह असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ केवल मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤° के लिये नहीं, समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ जगत के लिये है। दिगमà¥à¤¬à¤° जैन परंपरा यह संदेश देती है कि à¤à¤• दूसरे के सहयोग के बिना संसार में कोई जीवित नहीं रह सकता। उकà¥à¤¤ आशय के विचार उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾, लोक सेवा पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन à¤à¤µà¤‚ जन शिकायत निवारण मंतà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ जयà¤à¤¾à¤¨ सिंह पवैया ने वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किà¤à¥¤ शà¥à¤°à¥€ पवैया यहाठसतà¥à¤¯à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ की टेकरी पर दिगमà¥à¤¬à¤° जायसवाल जैन समाज दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आयोजित वारà¥à¤·à¤¿à¤• मेले के कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को संबोधित कर रहे थे।
उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ ने कहा कि जहाठसंतवाणी सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ को मिलती है, वहाठतीरà¥à¤¥ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ चलकर आते हैं। à¤à¤¸à¤¾ ही आà¤à¤¾à¤¸ आज इस मेले में हो रहा है। दिगमà¥à¤¬à¤° जैन समाज दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इस अवसर पर शà¥à¤°à¥€ पवैया को शॉल-शà¥à¤°à¥€à¤«à¤² à¤à¥‡à¤‚ट कर समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में परम पूजà¥à¤¯ संत शà¥à¤°à¥€ सà¥à¤¬à¤² सागर जी महाराज सहित जैन समाज के पदाधिकारीगण à¤à¤µà¤‚ बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में जैन धरà¥à¤®à¤¾à¤µà¤²à¤®à¥à¤¬à¥€ मौजूद थे।