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इन सिरेमिक प्लेट में सिंधिया शासक करते थे जहर का टेस्ट, फिर खाते थे खाना

ग्वालियर.सिंधिया राजवंश के शासक खाना तभी खाते थे, जब उसकी क्वालिटी और खासतौर से जहर का परीक्षण हो जाता था। यह परीक्षण होता था चीन से आई विशेष क्रॉकरी में। जैसे ही इस प्लेट में फूड डाला और यदि उसका रंग बदल जाता था । अब ये प्लेट्स सिंधिया के म्यूजियम का हिस्सा हैं।
 
 
 

-पुराने जमाने में राजाओं को हमेशा डर रहता था कि कहीं विद्रोह नहीं हो जाए और यदि ऐसा होगा तो उनकी हत्या भी हो सकती है। इसलिए वे अपनी सिक्यूरिटी का विशेष ध्यान रखते थे।
-इसी सिक्यूरिटी का हिस्सा थीं ये स्पेशल क्रॉकरी, जो किसी भी जहर का परीक्षण सटीकता से करती थीं। ग्वालियर के सिंधिया राजवंश के राजा इस क्रॉकरी को विशेष रूप से चीन से लेकर आए थे।
-इस प्लेट की खासियत यह है इसमें फूड डालते ही तुरंत टेस्ट शुरू हो जाता है। यदि जहर हुआ तो प्लेट का रंग बदल जाता था। यह विशेष केमिकल के कारण होता है।
 
केमिकल की कोटिंग होती थी इस क्रॉकरी में
दरअसल जहर परीक्षण करने वाली क्रॉकरी भी विशेष तरीके से तैयार की जाती है। साधारण सिरेमिक की क्रॉकरी को भट्टी में दो बार पकाया जाता है, लेकिन केमिकल कोटिंग वाली क्रॉकरी केवल एक ही बार भट्टी में जाती है।
-दूसरी बार इस पर एक विशेष केमिकल, सैलेडॉन की कोटिंग की जाती है। यही केमिकल जहर का परीक्षण करता है। ऐसी तीन प्लेट्स सिंधिया के म्यूजियम जयविलास पैलेस में हैं।
 
चीन में विकसित हुई यह तकनीक
-इस प्रकार की तकनीक चीन में विकसित हुई थी और दुनिया में बहुत कम ऐसे क्रॉकरी है। इस क्रॉकरी का पूरा डिनर सेट हैदराबाद के निजाम शासक के पास था, जो अब सालारजंग म्यूजियम में रखा है।
-सिंधिया राजवंश के माधौ महाराज ने चीन से ये प्लेट्स मंगाई थीं। माधौ महाराज को दुनिया की नायाब वस्तुएं एकत्र करने का शौक था और अब ये सभी म्यूजियम में रखी हैं।

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