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रोजगार योजनाओं की सब्सिडी लेकर ऋण वितरित न करने वाले बैंकों के विरूद्ध

अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश

बैंकर्स की जिला स्तरीय समन्वय समति की बैठक सम्पन्न

पशुपालन विभाग की रोजगारमूलक योजनाओं में 22 लाख से अधिक की सब्सिडी राशि लेने के बाद भी ऋण प्रकरण स्वीकृत न करने वाले बैंकों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाए। कलेक्टर डॉ. संजय गोयल द्वारा जिला स्तरीय बैंकर्स समन्वय समिति की बैठक में यह निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं में अनुदान राशि प्राप्त करने के बाद बैंकों द्वारा हितग्राही को राशि का वितरण न किया जाना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाईन के भी विरूद्ध है। ऐसे बैंकर्स के विरूद्ध कार्रवाई किया जाना आवश्यक है।

      बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. नीरज कुमार सिंह, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि, लीड बैंक प्रबंधक श्री डी के जैन सहित सभी बैंकों के समन्वयक व विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

      कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने कहा कि सरकार द्वारा समाज के गरीब, पिछड़े बेरोजगार वर्ग के लोगों के लिये विभिन्न कल्याणकारी योजनायें बैंकों के माध्यम से संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बैंकों द्वारा निर्धारित समय-सीमा में प्रकरण स्वीकृत न करने और स्वीकृत प्रकरणों में आसानी से वितरण न करने की प्रवृत्ति पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा बैंकों के एनपीए प्रकरणों में आरआरसी जारी कर वसूली में सहयोग किया जाता है। प्रशासन बैंकों से बेहतर सहयोग की अपेक्षा रखता है।

      समीक्षा के दौरान पशुपालन विभाग के उपसंचालक श्री ओ पी त्रिपाठी ने बताया कि उनके विभाग की डेयरी बकरी पालन योजना के तहत जिले की 9 बैंकों द्वारा 127 प्रकरणों की स्वीकृति गत पाँच वर्षों में जारी की गई। इसके बदले पशुपालन विभाग ने 22 लाख 8 हजार 711 रूपए अनुदान राशि बैंकों के खातों में जमा करा दी गई थी। लेकिन बैंकों द्वारा आज दिनांक तक ऐसे प्रकरणों में न तो वितरण किया गया और न ही अनुदान राशि का समायोजन किया गया। इन बैंकों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की छीमक, चीनौर, डबरा, भितरवार शाखा, पंजाब एण्ड सिंध बैंक डबरा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की हस्तिनापुर और आंतरी शाखायें सम्मिलित हैं।

इस संबंध में कलेक्टर डॉ. संजय गोयल द्वारा गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी बैंकों के समन्वय अधिकारियों को आगाह किया कि आगामी 15 दिवस के अंदर या तो संबंधित बैंकें यह उक्त राशि विभाग को वापस करें या उनके बदले में अन्य प्रकरण स्वीकृत करें। अगर बैंकें ऐसा नहीं करती हैं तो उन बैंकों के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों के विरूद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराया जायेगा।

      डॉ. गोयल ने मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत एक भी प्रकरण सवीकृत न किए जाने पर आदिम जाति कल्याण विभाग के मण्डल संयोजक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।

      जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री नीरज कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिले को 1400 का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके विरूद्ध 900 प्रकरण बैंकों द्वारा स्वीकृत कर 317 प्रकरणों में वितरण कर दिया गया है।

      जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र द्वारा संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 221 प्रकरणों का लक्ष्य जिले को प्राप्त हुआ है, जिसके विरूद्ध अभी तक 72 प्रकरण बैंकों को भेजे जा चुके हैं। बैंकों द्वारा 17 प्रकरणों में वितरण कर दिया गया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 2310 प्रकरणों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, इसके विरूद्ध अभी तक 1973 प्रकरण बैंकों को भेजे जा चुके हैं तथा बैंकों द्वारा 507 प्रकरणों की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

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