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कुलभूषण जाधव: सुषमा बोलीं, फांसी हुई तो परिणाम भुगतेगा पाकिस्तान

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के मुद्दे पर आक्रोशित सरकार ने लोकसभा में कहा कि जाधव को बचाने के लिए भारत सरकार जो भी करना होगा, वह करेगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि कुलभूषण के खिलाफ जासूसी करने का कोई सबूत पाक के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार देश के बेटे जाधव को बचाकर लाएगी।

सुषमा स्वराज ने आगाह किया कि अगर भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को मौत की सजा दी जाती है तो पड़ोसी देश के साथ कूटनीतिक संबंधों पर इसका असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, जाधव को न्याय दिलाने के लिए भारत कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा। सुषमा ने कहा कि कुलभूषण जाधव पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह मनगढ़ंत तथा हास्यास्पद हैं और उनके द्वारा गलत काम करने का कोई सबूत नहीं है।

वहीं लोकसभा में आज सदस्यों द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, पाकिस्तान द्वारा जाधव को फांसी की सजा सुनाए जाने पर पूरा देश न केवल चिंतित है बल्कि आक्रोशित भी है। सरकार इस सजा की कड़ी निंदा करती है जो कि कानून और न्याय के मूलभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखे बिना सुनाई गई है।

पाक ने किया जाधव का अपहरण-राजनाथ

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं जो ईरान के चाबहार में छोटा मोटा कारोबार करते थे और इसमें एक स्थानीय ईरान नागरिक उनका पार्टनर भी था। कारोबार के सिलसिले में उनका चाबहार में आना जाना लगा रहता था। मार्च 2016 में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने चाबहार से जाधव का अपहरण किया और पाकिस्तानी मीडिया के समक्ष उन्हें भारतीय जासूस के रूप में पेश किया गया।

राजनाथ सिंह ने बताया कि पाकिस्तान का कहना था कि जाधव के पास से एक वैध भारतीय पासपोर्ट मिला है। गृह मंत्री ने कहा, वैध पासपोर्ट मिलना इस बात का सबूत कैसे हो जाता है कि वह भारतीय जासूस थे। यह घटना पाकिस्तान को बेनकाब करती है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास ने 13 बार जाधव को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराने के प्रयास किए लेकिन काउंसलर एक्सेस जाधव को मुहैया नहीं कराई गई।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत बिना काउंसलर एक्सेस के सुनायी गयी इस सजा की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा, जाधव की जान बचाने के लिए चाहे जो भी करना होगा, भारत सरकार करेगी। कुलभूषण के साथ न्याय होगा। गौरतलब है कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनायी है।

लोकसभा में ओवैसी बोले, सरकार बचाए कुलभूषण जाधव को

लोकसभा में कांग्रेस ने कुलभूषण जाधव की फांसी का मुद्दा उठाया। सोमवार को पाक की आर्मी कोर्ट ने भारत के पूर्व नेवी अफसर जाधव को मौत की सजा सुनाई थी। चर्चा के दौरान सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, पाक की सैन्य अदालत एक 'बनाना' अदालत है, जहां किसी नियम का पालन नहीं किया जाता। जाधव को बचाना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार को दबाव को बनाकर जाधव की रिहाई के प्रयास करने चाहिए। वहीं लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर कुलभूषण जाधव को बचा नहीं पाए तो यह सरकार की कमजोरी होगी।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार फांसी का विरोध करती है। कुलभूषण जाधव को बचाने के लिए भारत सरकार हर कदम उठाएगी और इसके लिए जो भी करना हो किया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए लोकसभा में नोटिस दिया। इसके साथ पार्टी कश्मीर में जारी हिंसा और अस्थिरता के मुद्दे पर भी बहस चाहती है।

कुलभूषण जाधव को फांसी: मौत की सजा से सदमे में परिवार

पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में पूर्व भारतीय नौसैनिक कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा के ऐलान के बाद मुंबई में रह रहा उनका परिवार गहरे सदमे में है। जब मीडियाकर्मी ने उनके मुंबई स्थित फ्लैट में पहुंचकर बात करनी चाही तो परिवार वहां से किसी अज्ञात स्थान पर चला गया। दोस्तों का कहना है कि उन्हें पहले से ही शक था कि पाक जाधव का हाल भी सरबजीत जैसा ही करेगा।

दोस्तों ने बताया कि जाधव की पत्नी, उनकी मां, बेटा शुभांकर और बेटी भरवी रविवार को छुट्टियां मनाने पुणे से मुंबई आए थे। वे यहां हीरानंदानी गार्डन्स में सिल्वर ओक अपार्टमेंट के फ्लैट मं ठहरे हुए थे। यह फ्लैट जाधव परिवार का ही है। जाधव के पिता सुधीर जाधव और उनके चाचा सुभाष जाधव मुंबई पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद से रिटायर हुए हैं। उनके पिता महाराष्ट्र के सांगली में रिटायर्ड जीवन बिता रहे हैं।

पाक ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उडा़ई

कुलभूषण की फांसी की सजा पर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एमनेस्टी ने कहा है कि जाधव को मौत की सजा देकर पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने एक बार फिर दिखा दिया है कि किस तरह उसने अंतरराष्ट्रीय मानकों का माखौल उड़ाया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आर्मी कोर्ट के फैसले की क्षमता पर भी सवाल उठाए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया निदेशक बिराज पटनायक ने कहा, कुलभूषण जाधव को मौत की सजा देना दर्शाता है कि किस तरह पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय मानकों की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने बयान जारी कर कहा, बचावकतार्ओं को उनके अधिकारों से वंचित करना और कुख्यात गोपनीय तरीके से काम कर सैन्य अदालतें न्याय नहीं करतीं बल्कि उसका मजाक उड़ाती हैं। उनकी काफी गलत व्यवस्था है जिन्हें केवल सैन्य अनुशासन के मुददों से निपटना चाहिए न कि अन्य अपराधों से।

जाधव को फांसी की सजा: नाराज भारत ने 12 पाक कैदियों की रिहाई रोकी

सीएम फडणवीस ने पाकिस्तान की आलोचना की

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पाकिस्तान की निंदा की। उन्होंने कहा कि इसका मकसद पाकिस्तान के लोगों का अपनी सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाना है। फडणवीस ने कहा कि हम पाकिस्तान सेना के कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं। इस बीच, वकील उज्ज्वल निकम ने कहा कि जाधव को बिना निष्पक्ष सुनवाई के मौत की सजा दी गई।

पाक के कैदियों की रिहाई रोकी

भारत ने कुलभूषण जाधव के मामले में जवाबी कार्रवाई करते हुए पाक के दर्जन भर कैदियों की रिहाई न करने का फैसला किया है। इन कैदियों को बुधवार को छोड़ा जाना था। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सरकार मानती है कि यह पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई का उचित समय नहीं है। दोनों देश सामान्य तौर पर सजा पूरी करने के बाद एक-दूसरे के कैदियों को रिहा कर देते हैं। लेकिन जाधव के खिलाफ पाक की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया है।

भारत ने सौंपा विरोध पत्र

भारत ने विरोध में कहा है कि यदि एक भारतीय नागरिक के खिलाफ यह सजा कानून और न्याय के मूल मानदंडों को देखे बिना दी जाती है, तो भारत सरकार और यहां के लोग इसे पूर्व नियोजित हत्या का मामला मानेंगे। राजधानी में सोमवार को विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया और इस बारे में विरोध पत्र सौंपा।

जाधव और सरबजीत ही नहीं कई भारतीय हुए पाक के जुल्मों के शिकार

इसमें कहा गया है, 'हमने एक भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के बारे में सोमवार को आईएसपीआर (पाक सेना की मीडिया शाखा) की प्रेस विज्ञप्ति देखी है। पिछले साल ईरान से जाधव का अपहरण कर लिया गया था और पाकिस्तान में उसके बाद की मौजूदगी पर कभी भी विश्वसनीय जानकारी नहीं दी गई। भारत सरकार ने इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग के माध्यम से बार-बार उन तक राजनियक पहुंच देने की मांग की। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक इस आशय के अनुरोध औपचारिक रूप से 25 मार्च 2016 और 31 मार्च 2017 के बीच 13 बार किए गए थे। पाकिस्तान अधिकारियों ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।'

जासूसी का आरोप: पाक कोर्ट ने सुनाई कुलभूषण जाधव को मौत की सजा

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