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अनुशासन का चाबुक चल सकता है यशोधरा पर

ग्वालियर। अटेर उपचुनाव के बाद सिंधिया राजघराने की सदस्य और राज्य केबिनेट की मत्री यशोधरा राजे पर भाजपा आलाकमान अनुशासन का चाबुक चला सकता है। यशोधरा राजे के बयान को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध पार्टी में बगावत समझा जा रहा है। यही नहीं यशोधरा राजे के साथ उनके बयान में सुर में सुर मिलाने वालों के खिलाफ भी पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक म.प्र. के खेल युवा मामलों की मंत्री यशोधरा राजे ने जिस तरह के तत्कालीन सिंधिया शासकों के खिलाफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की टिप्पणी का खुलकर विरोध सडक़ों पर ला दिया है, उससे पार्टी संगठन बेहद नाराज हैं। वह पहले तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष प्रभात झा की भी इसी तरह खिलाफत कर चुकी हैं और प्रभात झा को प्रदेशाध्यक्ष के पद से निपटाने में सारा ताना बाना उन्होंने ही बुना था। इसी कारण पार्टी के वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहानइस मामले में कतई रिस्क नहीं लेना चाहते। उन्होंने सारी जानकारी आलाकमान के समक्ष रख दी हैं और अपनी सफाई में यह भी तर्क रखा है कि कांग्रेस द्वारा पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिस तरह से आगे बढ़ाया जा रहा है, उसकी काट अभी से जरूरी है, अन्यथा मिशन 2018 फेल हो सकता है। इसी वजह से पार्टी अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ खड़ी हो जाने वाली यशोधरा राजे पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। 
इस कार्रवाई में एक केन्द्रीय मंत्री पर भी गाज गिर सकती है, जिन्होंने मुख्यमंत्री की टिप्पणी को अफसोसजनक बताया था। वहीं कुछ अन्य यशोधरा राजे समर्थक भाजपाईयों को भी सूचीबद्ध किया है जो सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं लेकिन इस मामले में यशोधरा राजे अभी भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान से नाराज चल रही हैं। वह भी अपना विरोध जताने के लिये कभी भी केबिनेट से इस्तीफा भी दे सकती है लेकिन इस सारे मामले में सिंधिया राज परिवार के धुर विरोधी बजरंगी नेता व केबिनेट मंत्री कुंवर जयभान सिंह पवैया की चुप्पी अभी तक रहस्यमयी बनी हुई है। सिंधिया के खिलाफ आवाज उठाने वाले पवैया अभी तक इस मामले में बयानों से बच रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पवैया ने जानबूझकर ही चुप्पी साध ली है क्योंकि जब पवैया सिंधिया के खिलाफ बोलते हैं तो उनके साथ कोई भी भाजपा नेता नहीं खड़ा होता बल्कि उनके खिलाफ सिंधिया से हाथ और मिला लेते हैं। इसी कारण पवैया भी वर्तमान समय का तकाजा जानकर चुप हैं। वह वेट और वॉच की स्थिति में हैं। 
सबसे खास बात यह है कि अभी राज्य के कई मंत्री और पार्टी पदाधिकारी उप चुनाव में व्यस्त हैं और कोई मैसेज कार्यकर्ताओं व जनता में गलत न जाये, इसलिये चुप हैं लेकिन यह बात तय है कि अंदर ही अंदर पार्टी में यशोधरा राजे के खिलाफ खिचड़ी पक रही है और उप चुनाव के बाद चौंकाने वाले निर्णय आ सकते हैं।

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