तीन तलाक: सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ में आज निकाह-हलाला और बहà¥à¤µà¤¿à¤µà¤¾à¤¹ पर सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ
सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ आज तीन तलाक, निकाह-हलाला और बहà¥à¤µà¤¿à¤µà¤¾à¤¹ पर सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ करेगा। पिछली सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ में ऑल इंडिया मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® परà¥à¤¸à¤¨à¤² लॉ बोरà¥à¤¡ (à¤à¤†à¤ˆà¤à¤®à¤ªà¥€à¤à¤²à¤¬à¥€) ने सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ से कहा कि मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ तीन तलाक, निकाह हलाला और बहà¥à¤µà¤¿à¤µà¤¾à¤¹ की पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ देने वाली याचिकाà¤à¤‚ विचारयोगà¥à¤¯ नहीं हैं। साथ ही ये कोरà¥à¤Ÿ के दायरे में नहीं आते हैं। आपको बता दें कि सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ में टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² तलाक को असंवैधानिक करार देने वाली विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ याचिकाà¤à¤‚ दाखिल हà¥à¤ˆà¥¤
सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ पहले ही यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कर चà¥à¤•ा है कि वह तीन तलाक संबंधी कानूनी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ पर केवल विचार विमरà¥à¤¶ करेगा। कोरà¥à¤Ÿ इस बात पर फैसला नहीं करेगा कि मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® परà¥à¤¸à¤¨à¤² लॉ के तहत तलाक पर अदालतें नजर रखेंगी या नहीं। वहीं मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® बोरà¥à¤¡ ने का कहना है कि इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ कानून, जिसकी बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦ अनिवारà¥à¤¯ तौर पर पवितà¥à¤° कà¥à¤°à¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚ उस पर आधारित सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ पर पड़ी है, की वैधता संविधान के खास पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर परखी नहीं जा सकती है। इनकी संवैधानिक वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ जबतक जरूरी न हो जाà¤, तबतक उसकी दिशा में आगे बà¥à¤¨à¥‡ से नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• संयम बरतने की जरूरत है
मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® लॉ बोरà¥à¤¡ का कहना है याचिकाओं में उठाये गठमà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ विधायी दायरे में आते हैं, और चूंकि तलाक निजी मामला है इसलिठउसे मौलिक अधिकारों के तहत लाकर लागू नहीं किया जा सकता। बोरà¥à¤¡ ने दावा किया कि याचिकाà¤à¤‚ गलत समठके चलते दायर की गई हैं और यह चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® परà¥à¤¸à¤¨à¤² कानून की गलत समठपर आधारित है। बोरà¥à¤¡ का कहना है कि संविधान हर धारà¥à¤®à¤¿à¤• वरà¥à¤— को धरà¥à¤® के मामलों में अपनी चीजें खà¥à¤¦ संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ की इजाजत देता है।
à¤à¤†à¤ˆà¤à¤®à¤ªà¥€à¤à¤²à¤¬à¥€ ने शीरà¥à¤· अदालत में अपने लिखित हलफनामे में कहा, शà¥à¤°à¥‚ में यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ किया जाता है कि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ याचिकाà¤à¤‚ विचारयोगà¥à¤¯ नहीं हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि याचिकाकरà¥à¤¤à¤¾ निजी पकà¥à¤·à¥‹à¤‚ के खिलाफ मौलिक अधिकारों को लागू करने की मांग करते हैं। यह à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ किया जाता है कि 14,15 और 21 अनà¥à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦à¥‹à¤‚ के तहत गारंटित संरकà¥à¤·à¤£ की उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ की मंशा विधायिका और कारà¥à¤¯à¤ªà¤¾à¤²à¤¿à¤•ा के विरूदà¥à¤§ है न कि निजी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विरूदà¥à¤§ है।
उसने कहा, यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ किया जाता है कि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ मामले में याचिकाकतारॠनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• आदेश की मांग कर रहे हैं जो बिलà¥à¤•à¥à¤² अनà¥à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦ 32 के दायरे के बाहर है। निजी अधिकारों को संविधान के अनà¥à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦ 32 (1) के तहत वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त नागरिकों के विरूदà¥à¤§ लागू नहीं किया जा सकता है।