पाक को बड़ी चोट देने की तैयारी, मोदी ने सिंधॠजल संधि पर बà¥à¤²à¤¾à¤ˆ बैठक
नई दिलà¥à¤²à¥€à¥¤ उरी में हà¥à¤ आतंकी हमले के बाद से ही पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के खिलाफ देश में गà¥à¤¸à¥à¤¸à¥‡ की लहर है। देशà¤à¤° में पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के खिलाफ सखà¥à¤¤ कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ की मांग हो रही है। लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार जलà¥à¤¦à¤¬à¤¾à¤œà¥€ में कà¥à¤› करने के बजाय हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है। पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को दूसरे तरीकों से जवाब देने की तैयारी हो रही है। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में à¤à¤• तरीकाहै सिंधॠजल संधि को लेकर पà¥à¤¨à¤°à¥à¤µà¤¿à¤šà¤¾à¤° का। इसी मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी ने आज à¤à¤• अहम बैठक बà¥à¤²à¤¾à¤ˆ है। सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• इसमें संधॠजल संधि से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ तमाम पहलà¥à¤“ं पर चरà¥à¤šà¤¾ होगी।
पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के साथ सिंधॠजल संधि के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर होने वाली यह बैठक आज सà¥à¤¬à¤¹ उनके आवास पर होगी। इस बैठक में सिंधॠजल संधि से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ महकमों के अफसरों के साथ समà¤à¥Œà¤¤à¥‡ की समीकà¥à¤·à¤¾ की जाà¤à¤—ी। संà¤à¤µà¤¤ इस संधि को तोड़ने से होने वाले नफा-नà¥à¤•सान पर à¤à¥€ चरà¥à¤šà¤¾ होगी। बैठक में पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ के अलावा जल संसाधन मंतà¥à¤°à¥€ उमा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ à¤à¥€ शामिल होंगी।
आपको बता दें कि पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ का à¤à¤• बड़ा इलाका सिंधॠनदी के पानी पर आशà¥à¤°à¤¿à¤¤ है। उरी में आतंकी हमले के बाद के हर कोने से à¤à¤• ही आवाज उठी। पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को सबक सिखाओ, लेकिन सबक सिखाà¤à¤‚ तो कैसे? पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के साथ सीधी जंग तो मà¥à¤®à¤•िन नहीं। इसलिठपाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की कमर तोड़ने के लिठसिंधॠजल संधि तोड़ने का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ सामने आया।
विदेश मंतà¥à¤°à¤²à¤¾à¤¯ के पà¥à¤°à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ विकास सà¥à¤µà¤°à¥‚प ने कहा कि मà¥à¤à¥‡ यकीन है कि आप यह जानते होंगे कि सिंधॠजल संधि को लेकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच मतà¤à¥‡à¤¦ है। यह मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ दोनों पकà¥à¤·à¥‹à¤‚ के बीच बातचीत का है, लेकिन मैं à¤à¤• मूल बात कहना चाहता हूं। आपसी सहयोग बना रहे इसके लिठसदà¥à¤à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ और आपसी à¤à¤°à¥‹à¤¸à¥‡ की जरूरी होती है।
विशà¥à¤µ बैंक की मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ के बाद 19 सितंबर 1960 में à¤à¤¾à¤°à¤¤ और पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच सिंधॠजल समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ हà¥à¤† था। तब à¤à¤¾à¤°à¤¤ के ततà¥à¤•ालीन पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ जवाहर लाल नेहरू और पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ जनरल अयूब खान ने इस समà¤à¥Œà¤¤à¥‡ पर मà¥à¤¹à¤° लगाई थी। संधि के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को सिंधà¥, à¤à¥‡à¤²à¤®, चिनाब, सतलà¥à¤œ, वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ और रावी नदी का पानी देगा। मौजूदा समय में इन नदियों का 80 फीसदी से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को ही मिलता है।
अगर à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने इन नदियों का पानी पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को देना बंद कर दिया तो पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की कृषि और जल आधारित उदà¥à¤¯à¥‹à¤—-धंधे चौपट हो जाà¤à¤‚गे कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की आधी से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खेती इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ नदियों के पानी पर निरà¥à¤à¤° है। हालांकि सिंधॠजल संधि तोड़ने के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर जानकार à¤à¤•राय नहीं हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° का मानना है कि ये समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ पिछले 56 साल से बगैर किसी रà¥à¤•ावट के जारी है। इस दौरान à¤à¤¾à¤°à¤¤-पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के रिशà¥à¤¤à¥‡ कई बार बद से बदतर हà¥à¤, लेकिन सिंधॠजल संधि पर कोई असर नहीं पड़ा।
सिंधॠजल संधि के बाद à¤à¤¾à¤°à¤¤ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच 3 यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤à¥¤ दोनों देशों के बीच पहली जंग 1965 में हà¥à¤ˆà¥¤ 1971 में बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ की आजादी की जंग हà¥à¤ˆ और 1999 में करगिल यà¥à¤¦à¥à¤§à¥¤ इस दौरान पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ समरà¥à¤¥à¤¿à¤¤ आतंकवादियों ने कई बार हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ को दहलाने की à¤à¥€ कोशिश की।
2001 में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसद पर आतंकी हमला, 2008 में 26/11 आतंकी हमला, जिसे 10 पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ आतंकियों ने अंजाम दिया था। गà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¸à¤ªà¥à¤° के दीनानगर पà¥à¤²à¤¿à¤¸ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ पर आतंकी हमला, पठानकोट à¤à¤¯à¤°à¤¬à¥‡à¤¸ पर आतंकी हमला समेत कई बड़े आतंकी हमलों के पीछे पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ आतंकियों का हाथ है, लेकिन इतना सब कà¥à¤› होने के बाद à¤à¥€ सिंधॠजल संधि बदसà¥à¤¤à¥‚र कायम रही।
इन हमलों के बाद à¤à¥€ सिंधॠजल संधि बरकरार रही हालांकि 2002 में जमà¥à¤®à¥‚-कशà¥à¤®à¥€à¤° विधानसà¤à¤¾ में इस संधि को खतà¥à¤® करने की मांग जरूर उठी थी, लेकिन हà¥à¤† कà¥à¤› नहीं। जानकारों का कहना है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ और पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच सिंधॠजल संधि à¤à¤• अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ संधि है, जिसे à¤à¤•तरफा फैसले से तोड़ पाना आसान नहीं। अगर à¤à¤¸à¤¾ किया गया तो दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सामने यह संदेश जाà¤à¤—ा कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ कानूनी तौर पर लागू संधि का उलà¥à¤²à¤‚घन कर रहा है। जानकारों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• दोनों देश आपसी सहमति से इस संधि में बदलाव कर सकते हैं या नई शरà¥à¤¤à¥‹à¤‚ पर नया समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ बना सकते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में à¤à¤¸à¤¾ नामà¥à¤®à¤•िन है।
कà¥à¤¯à¤¾ है सिंधॠजल संधि
1960 में पानी के बंटवारे को लेकर à¤à¤¾à¤°à¤¤-पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में à¤à¤• समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ हà¥à¤† था। इस समà¤à¥Œà¤¤à¥‡ पर ततà¥à¤•ालीन पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दसà¥à¤¤à¤–त किठथे। इस समà¤à¥Œà¤¤à¥‡ के तहत सतलà¥à¤œ, बà¥à¤¯à¤¾à¤¸, रावी, सिंधà¥, à¤à¥‡à¤²à¤® और चेनाब नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। सतलà¥à¤œ, बà¥à¤¯à¤¾à¤¸ और रावी का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पानी à¤à¤¾à¤°à¤¤ के हिसà¥à¤¸à¥‡ आता है। जबकि सिंधà¥, à¤à¥‡à¤²à¤® और चेनाब का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पानी पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के हिसà¥à¤¸à¥‡ आता है। सिंधà¥, à¤à¥‡à¤²à¤® और चेनाब के बहाव पर à¤à¤¾à¤°à¤¤ का नियंतà¥à¤°à¤£ सीमित है। इस पानी से पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में कई पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ और सिंचाई होती है।
सिंधॠजल संधि रदà¥à¤¦ हà¥à¤ˆ तो पाक होगा ये नà¥à¤•सान
उरी में आतंकी हमले के बाद देश में आकà¥à¤°à¥‹à¤¶ है। मांग उठरही है कि सिंधॠजल समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ रदà¥à¤¦ किया जाà¤à¥¤ अगर यह समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ रदà¥à¤¦ हà¥à¤† तो पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की कमर टूट जाà¤à¤—ी। समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ रदà¥à¤¦ हà¥à¤† तो पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ का बड़ा इलाका रेगिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ बन जाà¤à¤—ा। उसके à¤à¤• बड़े हिसà¥à¤¸à¥‡ में लोग पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥‡ रह जाà¤à¤‚गे। बिजली को लेकर हाहाकार मच सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पानी न मिलने की वजह से पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के कई बिजली पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ बंद हो जाà¤à¤‚गे। पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाà¤à¤—ा। वहां, खेती का बड़ा हिसà¥à¤¸à¤¾ बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ हो जाà¤à¤—ा। पहले से करà¥à¤œ में डूबा पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ यह à¤à¤Ÿà¤•ा सहन नहीं कर पाà¤à¤—ा।
बता दें, उरी हमले के बाद पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के खिलाफ लोगों का गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ और बढ़ा दिया है।अब बात यहां तक पहà¥à¤‚च गई है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ अपने इलाके से पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ जाने वाला पानी रोक दे। à¤à¤¾à¤°à¤¤ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच 4 यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤ हैं, लेकिन आज तक पानी बंद किठजाने की नौबत नहीं आई है। लेकिन, अब सरकार की तरफ से आज इस बारे में विचार किया जाà¤à¤—ा।