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सपा-कांग्रेस गठबंधन में नहीं बनी बात, अलग अलग लड़ेंगे चुनाव

विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के बीच बात बनती नजर नहीं आ रही है। बात सीटों के तालेमल पर अटकी है लेकिन सपा-कांग्रेस की ओर से विरोधाभासी बयान आने के चलते फिलहाल गठबंधन खटाई में पड़ गया है।

कांग्रेस ने जहां पहले और दूसरे चरण के प्रत्याशियों ने नामों को हरी झंडी दे दी है। वहीं सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा है कि कांग्रेस से गठबंधन लगभग टूट गया है। हालांकि राज बब्बर ने कहा कि कांग्रेस सभी 403 सीटों पर लड़ेगी और गठबंधन पर बातचीत में कोई रुकावट नहीं है।

मुलायम सिंह नाराज
माना जा रहा है कि मुलायम सिंह इस गठबंधन से खासे नाराज़ थे। सपा के कई उम्मीदवार भी नहीं चाहते थे कि सपा-कांग्रेस से गठबंधन हो। ऐसे में सपा ने पहले तो अपनी सूची जारी की फिर शुक्रवार से ही इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली। दोनों ओर से कोई ठोस बातचीत न होने के कारण गठबंधन पर शनिवार की शाम होते-होते विरास सा लग गया।

दोनों में नहीं हुई बातचीत
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के शुक्रवार को दिल्ली लौटने के बाद संभावना थी कि गुलाम नबी आजा़द शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश से बात करने लखनऊ आएंगे। शनिवार को दिनभर जहां कांग्रेस मुख्यालय पर उनका इंतजार होता रहा, वहीं मुख्यमंत्री आवास के बाहर सपाइयों में गठबंधन को लेकर तरह-तरह की चिंताएं जताई जाती रहीं। कांग्रेस भी स्टियरिंग कमेटी में पहले व दूसरे चरण के प्रत्याशियों के नाम तय करने में जुटी रही।

गठबंधन लगभग टूट गया
शाम को सपा नेता नरेश अग्रवाल ने दिल्ली में बयान दिया कि कांग्रेस से गठबंधन की बात लगभग खत्म हो गई है। हम उन्हें 99 सीटें दे रहे थे लेकिन कांग्रेस 115-125 सीटें मांग रही है जो नामुमकिन है।

रायबरेली-अमेठी अहम मुद्दा
सपा पिछले चुनाव में जीती सीटों को जहां छोड़ने को तैयार नहीं है, वहीं कांग्रेस रायबरेली और अमेठी की सभी सीटें चाहती है। कांग्रेस ने इस बात को सपा नेतृत्व को बता भी दिया था लेकिन सपा इस पर कतई तैयार नहीं हुई। सपा की तरफ से कांग्रेस को 79 या अधिकतम 85 सीटें देने की बात कही जा रही है, लेकिन कांग्रेस जीती सीटों पर अपना हक छोड़ने को तैयार नहीं है। इसके चलते गठबंधन की बात रुक गई है।

फैसला करेंगे अखिलेश
गठबंधन के सवाल पर सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम सिर्फ इतना ही कहा कि इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव करेंगे। उन्होंने कहा कि सपा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को प्रचार में जुटने का निर्देश दिया जा चुका है। सपा-कांग्रेस गठबंधन पर शनिवार को मंथन का दौर चलता रहा। दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बताया जाता है कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की अखिलेश से फोन पर बात भी हुई। सपा कांग्रेस को अधिकतम 85 सीटें देने पर ही राजी है, पर कांग्रेस की पिछले चुनाव में जीती सीटें छोड़ने को राजी नहीं हो रही है।

बात बिगड़ने के कारण
- कांग्रेस को सपा जीती सीटें देने को तैयार नहीं
- कांग्रेस 115 से 125 सीटों से कम पर नहीं हुई तैयार
- सपा अधिकतम 99 सीटें ही देने को राजी
-विरोध से बचने के लिए सपा ने खींचे कदम

गठबंधन के विरोध में
- सपा मुखिया मुलायम शुरुआती दौर से विरोध में रहे
-शिवपाल ने भी गठबंधन के औचित्य पर उठाया था सवाल
- राजा भैया भी कांग्रेस से गठबंधन का कर चुके हैं विरोध

गठबंधन के पक्ष में
- अखिलेश यादव ने की कांग्रेस से गठबंधन की पहल
- प्रो. राम गोपाल भी चाहते थे कांग्रेस से हो जाए गठबंधन
- किरणमय नंदा भी गठबंधन की कर चुके हैं वकालत

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