चार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाला कॉरिडोर MP में बनेगा, गडकरी का एलान-ग्रीनफील्ड हाईवे भी बनाएंगे
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शनिवार को मध्य प्रदेश के दौरे पर रहे। उन्होंने जबलपुर जिले से प्रदेश को कई सड़क योजनाओं की सौगात दी, साथ ही टाइगर कॉरिडोर बनाने की भी घोषणा की। प्रदेश में बनने वाला यह टाइगर कॉरिडोर चार टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ेगा, जिससे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश में 4,706 करोड़ रुपये की 10 सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।प्रदेश के चार टाइगर रिजर्व्स को जोड़ने वाले फोर-लेन कॉरिडोर 5,500 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा। वहीं, भोपाल-जबलपुर के बीच 15,000 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीनफील्ड हाईवे बनेगा। जबलपुर सांसद आशीष दुबे, राज्य के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और अन्य सांसदों की मांग पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इसकी घोषणा की। गडकरी ने सात किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के उद्घाटन के बाद सभा को संबाधित करते हुए कहा कि इस कॉरिडोर से पर्यटन, रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा कि टाइगर कॉरिडोर की लागत 4,600 करोड़ रुपये से बढ़कर अब लगभग 5,500 करोड़ रुपये हो गई है। यह कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच रिजर्व्स को आपस जोड़ेगा। गडकरी ने कहा कि 2022 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में 785 बाघ हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। उन्होंने कहा- भोपाल और जबलपुर के बीच 255 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण 15,000 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) दिसंबर तक तैयार कर ली जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री राकेश सिंह से अपील करते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सुगम बनाई जाए, जिससे निर्माण कार्य अगले साल अप्रैल या मई से शुरू हो सके।अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा- अमेरिका इसलिए धनवान नहीं है कि वहां की सड़कें अच्छी हैं, बल्कि सड़कें अच्छी होने के कारण अमेरिका धनवान है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गडकरी ने कहा कि मध्य प्रदेश की कृषि अपनी तरह से अलग है, मैं किसानों के बीच कार्य करता हूं। मैंने कृषि क्षेत्र में एआई इन एग्रीकल्चर की शुरुआत की है। मेरे खेतों में मौसम संबंधी उपकरण लगे हुए हैं और सैटेलाइट के माध्यम से मोबाइल पर सूचना मिल जाती है कि कब पानी या खाद देना है। यहां तक कि एक सप्ताह पहले ही रोगों की जानकारी भी मिल जाती है, जिससे खेती का उत्पादन डेढ़ गुना तक बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश कृषि के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहा है और इसके लिए जल संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दौड़ते पानी को चलने के लिए, चलते पानी को रोकने के लिए और रुके हुए पानी को जमीन में रिसने के लिए लगाया जाए, जिससे गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में और घर का पानी घर में रहे।
जितना मांगा उससे अधिक दिया