रेहा के प्रधान अजय कौशिक ने बाढ़ से घिरे रेहा, डगोरा, कछियारा के लिए, भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज सिंह ने भगवानपुरा, धांधूपुरा के लिए, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने गुढ़ा के लिए प्रभावित परिवारों के लिए खानपान की व्यवस्था की मांग की है। बाह के एसडीएम हेमंत कुमार, तहसीलदार दयाचंद पौरुष ने बताया कि तीन गांवों गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा में रसद पहुंचाई है। शुक्रवार को अन्य गांवों में रसद पहुंच जाएगी। बचाव राहत के लिए चा मोटरबाेट चलाई गई हैं। विस्थापितों के लिए आठ बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं। नदी किनारे के ग्रामीणों को ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचने के निर्देश दिए हैं।

गांव में पानी छतों पर लोग
उजड़े आशियाने, 200 परिवारों का टीले पर डेरा
बाढ़ में आशियाने उजड़े तो तराई के 200 परिवार चंबल के बीहड़ के टीले पर डेरा डालने को मजबूर हो गए। संसाधन वाले परिवार बाढ़ की आहट के साथ ही ट्रैक्टर ट्रॉलियों से अपना सामान लेकर पलायन कर गए थे लेकिन जो परिवार नहीं निकल सके, उनकी गृहस्थी का सामान बाढ़ के पानी से नष्ट हो गया। बचा सामान समेट कर टीले पर पहुंचे परिवारों ने एक बस्ती की तरह अपने तंबू तान लिए हैं। इसके पीछे एक-दूसरे के मन में सुरक्षा का अहसास कराने की भावना रही है। पुरा डाल गांव पूरा खाली हो गया है। गांव के श्यामलाल, एदल सिंह, थान सिंह, भूरे सिंह, पप्पू, नेतराम, होतम सिंह, नाथूराम, नेकराम, रूप सिंह, छत्रपाल, कप्तान सिंह, छोटेलाल, चिरंजीलाल ने अपने खूंटे से पशु खोल कर बीहड़ के टीले पर बांध दिए। खुद तंबू तान लिया है। उन्होंने बताया कि बिजली कटने से अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में खाना बना रहे हैं। बाढ़ ने खेती पूरी तरह से उजाड़ दी है। गांव से निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
बाढ़ में आशियाने उजड़े तो तराई के 200 परिवार चंबल के बीहड़ के टीले पर डेरा डालने को मजबूर हो गए। संसाधन वाले परिवार बाढ़ की आहट के साथ ही ट्रैक्टर ट्रॉलियों से अपना सामान लेकर पलायन कर गए थे लेकिन जो परिवार नहीं निकल सके, उनकी गृहस्थी का सामान बाढ़ के पानी से नष्ट हो गया। बचा सामान समेट कर टीले पर पहुंचे परिवारों ने एक बस्ती की तरह अपने तंबू तान लिए हैं। इसके पीछे एक-दूसरे के मन में सुरक्षा का अहसास कराने की भावना रही है। पुरा डाल गांव पूरा खाली हो गया है। गांव के श्यामलाल, एदल सिंह, थान सिंह, भूरे सिंह, पप्पू, नेतराम, होतम सिंह, नाथूराम, नेकराम, रूप सिंह, छत्रपाल, कप्तान सिंह, छोटेलाल, चिरंजीलाल ने अपने खूंटे से पशु खोल कर बीहड़ के टीले पर बांध दिए। खुद तंबू तान लिया है। उन्होंने बताया कि बिजली कटने से अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में खाना बना रहे हैं। बाढ़ ने खेती पूरी तरह से उजाड़ दी है। गांव से निकलने का कोई रास्ता नहीं है।

घरों में घुसा पानी
उमरैठा पुरा में अपना आशियाना उजड़ने से प्रभावित 20 परिवारों ने बीहड़ के टीले पर शरण ली है। गांव के भजनलाल, तहसीलदार, राजेन्द्र, होशियार, आशाराम, किशन सिंह, सोनीराम, विनोद ने बताया कि बाढ़ ने पूरी ग्रहस्थी उजाड़ दी है। पशु लेकर बीहड़ के टीले पर रहने को मजबूर हैं। अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज सिंह ने बताया कि गांव के 30 परिवारों ने टीले पर शरण ली है। रेहा के प्रधान अजय कौशिक ने बताया कि कछियारा, डगोरा, रेहा के 26 परिवार बीहड़ के टीले पर रहने को मजबूर हैं। सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि गुढ़ा के 12 परिवारों ने टीले पर शरण ली है।

डूब गए घऱ
घर डूबे, छतों पर रखा सामान, नदी के जलस्तर पर टिकीं निगाहें
गोहरा, उमरैठा पुरा, भगवानपुरा, झरनापुरा, गुढ़ा, रानीपुरा, भटपुरा गांव चंबल की बाढ़ से घिरे हुए हैं। घरों में पानी भर गया है। गलियां जलमग्न हो गई हैं। ग्रामीणों ने अपने घर का सामान छतों पर रख लिया है। अब नदी के जलस्तर पर निगाहें हैं। गोहरा में तोफान सिंह, महावीर सिंह, रामवीर बघेल, वीर सिंह, कलेक्टर की झोपड़ी डूब गई हैं। जोनी यादव, मुन्नेश, वीकेश, शैलेश यादव, तोफान सिंह, रिंगे खां, जय विजय के घरों में पानी भर गया है। जो परिवार गांव से निकल नहीं पाए, उन्होंने अपना सामान घरों की छत पर रख लिया है। ऊंचाई वाले इलाके के भगवानपुरा में 20 परिवारों ने, गुढ़ा में 15 परिवारों ने, उमरैठा पुरा में 21 परिवारों ने, झरनापुरा में 15 परिवारों ने, रानीपुरा और भटपुरा में 16 परिवारों ने, पुरा शिवलाल में 18 परिवारों ने अपने घरों की छतों पर शरण ली है।
गोहरा, उमरैठा पुरा, भगवानपुरा, झरनापुरा, गुढ़ा, रानीपुरा, भटपुरा गांव चंबल की बाढ़ से घिरे हुए हैं। घरों में पानी भर गया है। गलियां जलमग्न हो गई हैं। ग्रामीणों ने अपने घर का सामान छतों पर रख लिया है। अब नदी के जलस्तर पर निगाहें हैं। गोहरा में तोफान सिंह, महावीर सिंह, रामवीर बघेल, वीर सिंह, कलेक्टर की झोपड़ी डूब गई हैं। जोनी यादव, मुन्नेश, वीकेश, शैलेश यादव, तोफान सिंह, रिंगे खां, जय विजय के घरों में पानी भर गया है। जो परिवार गांव से निकल नहीं पाए, उन्होंने अपना सामान घरों की छत पर रख लिया है। ऊंचाई वाले इलाके के भगवानपुरा में 20 परिवारों ने, गुढ़ा में 15 परिवारों ने, उमरैठा पुरा में 21 परिवारों ने, झरनापुरा में 15 परिवारों ने, रानीपुरा और भटपुरा में 16 परिवारों ने, पुरा शिवलाल में 18 परिवारों ने अपने घरों की छतों पर शरण ली है।

बाढ़
गोहरा, भगवानपुरा, रानीपुरा, भटपुरा, उमरैठा पुरा, रेहा, गुढ़ा, क्योरी पुरा, पुरा डाल, डगोरा, कछियारा, मऊ की मढै़या गांव तक चंबल की बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जल भराव से तराई में बनी झोपड़ियां नष्ट हो गई हैं। झरनापुरा गांव में लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में सामान भरकर जलमग्न जोखिम भरे रास्ते से निकले। नेत्रपाल वर्मा ने बताया कि जान आफत में आने से लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। गली और घरों में पानी घुसने के अंदेशे से चिंतित परिवार अपना सामान समेट कर छतों पर पहुंच गए हैं। वहीं से चंबल नदी के पानी पर टकटकी लगाए हैं। बुधवार की दोपहर गोहरा गांव में कमला देवी, रामकली अपने घरों का सामान छत पर रख कर नदी के जलस्तर पर नजर रखे हैं। उन्होंने बताया कि खाना-पीना भी छत पर हो रहा है। पिछली बाढ़ में घरों में भरे पानी में सारा सामान नष्ट हो गया था, इसलिए छत पर रख लिया है।

बाढ़
रात में फसल की रखवाली को सोए थे, सुबह बाढ़ के पानी से घिरे
सिमराई गांव के पान सिंह, राजेंद्र सिंह बुधवार की रात अपनी बाजरा की फसल की रखवाली को मेहरा पर सोए थे। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह आंख खुली तो फसल बाढ़ में डूबी थी। मेहरा चारों तरफ से पानी से घिर गया था। मदद के लिए सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह पहुंचे। दोनों किसान अपनी चारपाई लेकर बमुश्किल निकल पाए। ऐसे ही दृश्य झरनापुरा, उमरैठा पुरा, भगवानपुरा, धांधूपुरा, रेहा में देखने को मिले। पुरा डाल के लोचन सिंह ने बताया कि बुधवार की शाम खेतों में पानी नहीं था, बृहस्पतिवार की सुबह सारे खेत डूब गए। रखवाली करने वाले खेतों में भरे पानी से मुश्किल से निकल पाए। संवाद
सिमराई गांव के पान सिंह, राजेंद्र सिंह बुधवार की रात अपनी बाजरा की फसल की रखवाली को मेहरा पर सोए थे। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह आंख खुली तो फसल बाढ़ में डूबी थी। मेहरा चारों तरफ से पानी से घिर गया था। मदद के लिए सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह पहुंचे। दोनों किसान अपनी चारपाई लेकर बमुश्किल निकल पाए। ऐसे ही दृश्य झरनापुरा, उमरैठा पुरा, भगवानपुरा, धांधूपुरा, रेहा में देखने को मिले। पुरा डाल के लोचन सिंह ने बताया कि बुधवार की शाम खेतों में पानी नहीं था, बृहस्पतिवार की सुबह सारे खेत डूब गए। रखवाली करने वाले खेतों में भरे पानी से मुश्किल से निकल पाए। संवाद

गांव के लोग
कई स्कूलों में भरा पानी
चंबल नदी की बाढ़ से स्कूल भी नहीं बच सके। रानीपुरा गांव का प्राइमरी स्कूल चारों तरफ से जलमग्न है, सिर्फ स्कूल का नाम लिखा हुआ दिख रहा है। ऐसा ही हाल उमरैठापुरा के प्राइमरी स्कूल का है। जलमग्न स्कूल परिसर की छत बची है। हालांकि, स्कूल में कक्षाओं का संचालन नहीं होता है। धांधूपुरा और गोहरा के स्कूल परिसरों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। आने-जाने के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ के पानी से घिरे भगवानपुरा गांव के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय, झरनापुरा के प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता जलमग्न है। कुंवरखेड़ा के प्राइमरी स्कूल तक भी पानी पहुंच गया है।
चंबल नदी की बाढ़ से स्कूल भी नहीं बच सके। रानीपुरा गांव का प्राइमरी स्कूल चारों तरफ से जलमग्न है, सिर्फ स्कूल का नाम लिखा हुआ दिख रहा है। ऐसा ही हाल उमरैठापुरा के प्राइमरी स्कूल का है। जलमग्न स्कूल परिसर की छत बची है। हालांकि, स्कूल में कक्षाओं का संचालन नहीं होता है। धांधूपुरा और गोहरा के स्कूल परिसरों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। आने-जाने के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ के पानी से घिरे भगवानपुरा गांव के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय, झरनापुरा के प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता जलमग्न है। कुंवरखेड़ा के प्राइमरी स्कूल तक भी पानी पहुंच गया है।

मगरमच्छ ने किया भैंस पर हमला
किसान ने बचाई भैंस, मगरमच्छ ने पूंछ में काटा
चंबल नदी की बाढ़ में झरनापुरा तक पहुंचे मगरमच्छ ने बृहस्पतिवार को पशुपालक दूरबीन की भैंस पर हमला कर दिया। जब तक वह डंडों से मगरमच्छ को भगाते, तब तक उसने भैंस की पूंछ में काट लिया। समाजसेवी नेत्रपाल वर्मा ने बताया कि बाढ़ के पानी से घिरे झरनापुरा की बिजली कट गई है। अंधेरे में मवेशी की मगरमच्छ आदि से सुरक्षा चुनौती बन गई है।
चंबल नदी की बाढ़ में झरनापुरा तक पहुंचे मगरमच्छ ने बृहस्पतिवार को पशुपालक दूरबीन की भैंस पर हमला कर दिया। जब तक वह डंडों से मगरमच्छ को भगाते, तब तक उसने भैंस की पूंछ में काट लिया। समाजसेवी नेत्रपाल वर्मा ने बताया कि बाढ़ के पानी से घिरे झरनापुरा की बिजली कट गई है। अंधेरे में मवेशी की मगरमच्छ आदि से सुरक्षा चुनौती बन गई है।

ग्रामीण कर रहे पलायन
बिजली कटने से अंधेरे में गांव, मगरमच्छ के हमले का खौफ
चंबल की बाढ़ से बाह के 38 गांव प्रभावित हुए हैं। गांव के चारों ओर और गलियों में भरे पानी में मगरमच्छ घूम रहे हैं। पानी में बह रहे सांप-बिच्छू तक घरों तक पहुंच रहे हैं। दिन में तो लोग सतर्क रहकर खुद और बच्चों को इनके हमले से बचा लेते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों भगवानपुरा, गुढ़ा, रेहा, कछियारा, डगोरा, क्योरी, बीच का पुरा, उमरैठा, पुरा डाल की बिजली कटी हुई है। रोशनी का काई इंतजाम नहीं है। मोमबत्ती तक प्रकाश के लिए मुहैया नहीं कराई गई है। जिससे रात के अंधेरे में मगरमच्छ के हमले या सांप के काटने का डर सताने लगा है। ग्रामीणों ने मोमबत्ती उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।
चंबल की बाढ़ से बाह के 38 गांव प्रभावित हुए हैं। गांव के चारों ओर और गलियों में भरे पानी में मगरमच्छ घूम रहे हैं। पानी में बह रहे सांप-बिच्छू तक घरों तक पहुंच रहे हैं। दिन में तो लोग सतर्क रहकर खुद और बच्चों को इनके हमले से बचा लेते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों भगवानपुरा, गुढ़ा, रेहा, कछियारा, डगोरा, क्योरी, बीच का पुरा, उमरैठा, पुरा डाल की बिजली कटी हुई है। रोशनी का काई इंतजाम नहीं है। मोमबत्ती तक प्रकाश के लिए मुहैया नहीं कराई गई है। जिससे रात के अंधेरे में मगरमच्छ के हमले या सांप के काटने का डर सताने लगा है। ग्रामीणों ने मोमबत्ती उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।

बाढ़
छह गांवों में शिविर, 250 रोगियों का उपचार, सीएमओ पहुंचे
सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बाढ़ प्रभावित गोहरा और उमरैठा पुरा पहुंचे। यहां पर अपने सामने ही शिविर लगा कर उपचार शुरू कराया। बाढ़ प्रभावितों को एतिहात बरतने और आपात स्थिति में स्वास्थ्य विभाग को कॉल करने को जागरूक किया। बाह के अधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें झरनापुरा, रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा, उमरैठा पुरा, जेबरा में पहुंची। शिविर लगाकर 250 मरीजों का उपचार किया। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीज खांसी, जुकाम और खाज, खुजली के रहे। दवाओं का वितरण किया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवांगी उदैनिया उमरैठा पुरा पहुंचीं। 27 बीमार पशुओं का इलाज किया। खुरपका, मुंहपका आदि बीमारियाें का टीकाकरण किया। उन्होंने बताया कि गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा में भी टीकाकरण के लिए पशुपालन विभाग की टीमें पहुंची। कुल 1050 पशुओं को टीके लगाए गए।
सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बाढ़ प्रभावित गोहरा और उमरैठा पुरा पहुंचे। यहां पर अपने सामने ही शिविर लगा कर उपचार शुरू कराया। बाढ़ प्रभावितों को एतिहात बरतने और आपात स्थिति में स्वास्थ्य विभाग को कॉल करने को जागरूक किया। बाह के अधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें झरनापुरा, रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा, उमरैठा पुरा, जेबरा में पहुंची। शिविर लगाकर 250 मरीजों का उपचार किया। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीज खांसी, जुकाम और खाज, खुजली के रहे। दवाओं का वितरण किया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवांगी उदैनिया उमरैठा पुरा पहुंचीं। 27 बीमार पशुओं का इलाज किया। खुरपका, मुंहपका आदि बीमारियाें का टीकाकरण किया। उन्होंने बताया कि गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा में भी टीकाकरण के लिए पशुपालन विभाग की टीमें पहुंची। कुल 1050 पशुओं को टीके लगाए गए।

चंबल नदी
पहले भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा जलस्तर
चंबल नदी पहले भी बाढ़ का कहर बरपा चुकी है। सिंचाई विभाग के मुताबिक 24 अगस्त 1996 को बाढ़ स्तर 136.60 मीटर रहा था। 17 सितंबर 2019 में बाढ़ का स्तर 136.10 मीटर था। 5 अगस्त 2021 में बाढ़ का स्तर 135.70 मीटर था। 24 अगस्त 2023 में 26 साल पुराना बाढ़ का रिकॉर्ड टूटा था। जलस्तर 137.60 मीटर तक पहुंच गया था। बृहस्पतिवार को चंबल नदी 134 मीटर के निशान पर बह रही है।
चंबल नदी पहले भी बाढ़ का कहर बरपा चुकी है। सिंचाई विभाग के मुताबिक 24 अगस्त 1996 को बाढ़ स्तर 136.60 मीटर रहा था। 17 सितंबर 2019 में बाढ़ का स्तर 136.10 मीटर था। 5 अगस्त 2021 में बाढ़ का स्तर 135.70 मीटर था। 24 अगस्त 2023 में 26 साल पुराना बाढ़ का रिकॉर्ड टूटा था। जलस्तर 137.60 मीटर तक पहुंच गया था। बृहस्पतिवार को चंबल नदी 134 मीटर के निशान पर बह रही है।

चंबल नदी
4 गांवों में 204 परिवारों तक पहुंची रसद
चंबल की बाढ़ से प्रभावित 4 गांव गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा में बृहस्पतिवार को 204 परिवारों तक राहत सामग्री पहुंच गई। ब्लॉक प्रमुख लाल सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया। राहत सामग्री में चना, चीनी, बिस्कुट, आटा, चावल, साबुन, दाल, हल्दी, मिर्च, सब्जी, तेल, नमक, मोमबत्ती, माचिस, सेनेटरी पैड, तौलिया, सूती कपड़ा, मग, डिटौल, तिरपाल, बाल्टी, बैग, लाई, आलू शामिल हैं। एसडीएम हेमंत कुमार ने बताया कि प्रत्येक बाढ़ प्रभावित तक राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी।
चंबल की बाढ़ से प्रभावित 4 गांव गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा में बृहस्पतिवार को 204 परिवारों तक राहत सामग्री पहुंच गई। ब्लॉक प्रमुख लाल सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया। राहत सामग्री में चना, चीनी, बिस्कुट, आटा, चावल, साबुन, दाल, हल्दी, मिर्च, सब्जी, तेल, नमक, मोमबत्ती, माचिस, सेनेटरी पैड, तौलिया, सूती कपड़ा, मग, डिटौल, तिरपाल, बाल्टी, बैग, लाई, आलू शामिल हैं। एसडीएम हेमंत कुमार ने बताया कि प्रत्येक बाढ़ प्रभावित तक राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी।

सुरक्षित स्थान तलाश रहे ग्रामीण
कटी बिजली, ये गांव अंधेरे में
बाढ़ के चलते गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, भगवानपुरा, झरनापुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल, डगोरा, रेहा, कछियारा, उमरैठा पुरा, क्योरी पुरा की बिजली काट दी गई है। गांव के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
बाढ़ के चलते गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, भगवानपुरा, झरनापुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल, डगोरा, रेहा, कछियारा, उमरैठा पुरा, क्योरी पुरा की बिजली काट दी गई है। गांव के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।