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सौरभ को जमानत दी

परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के मामले में भ्रष्टाचार की छापेमारी की जद में आए थे। लेकिन लोकायुक्त पुलिस तीन महीने में उसके खिलाफ कोर्ट में चालान प्रस्तुत नहीं कर पाई। तीन महीने में चालान प्रस्तुत नहीं कर पाने पर अदालत ने हैरानी जताई और मुख्य आरोपी सौरभ शर्मा, उसके राजदार और बिजनेस पार्टनर चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को जमानत दे दी है।

दरअसल, किसी भी जांच एजेंसी को कार्रवाई के तीन महीने के अंदर अदालत में चालान प्रस्तुत करना होता है। ऐसा नहीं करने पर अदालत को बताना होता है कि जांच में किन-किन बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है या तकनीकी साक्ष्य या किसी लैब की रिपोर्ट आने में समय लग रहा है। लेकिन लोकायुक्त पुलिस ने परिवहन विभाग के चेक पोस्टों से करोड़ों की अवैध कमाई के सरगना के रूप में सामने आए सौरभ शर्मा और उसके राजदारों के संबंध में ऐसी कोई दलील अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कि जिससे अदालत जमानत की याचिका खारिज कर सके।

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