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नेत्रहीनों को नहीं रास आई नोटबंदी, कहा-चूक गई सरकार

नोटबंदी में जारी किए गए नए नोट नेत्रहीनों को रास नहीं आ रहे। उनका कहना है कि मोदी सरकार नोट बदल ही रही थी तो उसके पास इन्‍हें नेत्रहीनों के अनुकूल बनाने का मौका था, लेकिन सरकार चूक गई। दूसरी ओर नोटबंदी से नेत्रहीनों के लिए समाज से आने वाला दान भी काफी कम हो गया है। à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¤¹à¥€à¤¨à¥‹à¤‚ की मांग पर केंद्रीय सामाजिक न्‍याय राज्‍य मंत्री वित्‍त विभाग को सुझाव भेजने की बात कर रहे हैं।

नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्‍लाइंड, हरियाणा ब्रांच के महासचिव हेम सिंह यादव कहते हैं कि सरकार ने नए नोटों में तिरछी लकीरों से फीलिंग दी है, लेकिन उससे समझ नहीं आ रहा। वह इफेक्‍टिव नहीं है। नोटों में ब्रेल लिपि का भी इस्‍तेमाल करना चाहिए था, इससे नकली नोट छापने पर भी लगाम लगती। ब्रेल में अक्षरों का उभार ज्यादा होता है, जिससे नेत्रहीन अक्षर समझ जाते हैं। लेकिन नए नोटों में ये उभार काफी कम हैं।

यादव का कहना है कि नए नोटों का कागज अच्‍छा है। उस पर हम ब्रेल लिपि का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यादव का कहना है कि वह इसके लिए संबंधित विभागों को पत्र लिखकर मांग करेंगे। उनका कहना है कि ब्‍लाइंड स्‍कूलों सैकड़ों बच्‍चे रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। पहले उनके लिए पर्याप्‍त चंदा आता था लेकिन नोटबंदी के बाद एकदम से यह कम हो गया है। कौन करेगा इसकी भरपाई?

यादव कहते हैं कि सिर्फ शब्‍द बदलने से नेत्रहीनों और अन्‍य दिव्‍यांगों की तकदीर नहीं बदलेगी। उसके लिए तो सरकार को वाकई काम करना होगा। देश में करीब डेढ़ करोड़ नेत्रहीन बताए गए हैं। केंद्रीय सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता राज्‍य मंत्री कृष्‍णपाल गुर्जर का कहना है कि अगर नए नोटों की लाइनें नेत्रहीनों के लिए इफेक्‍टिव नहीं हैं तो इस पर वह फाइनेंस डिपार्टमेंट एवं अन्‍य संबंधित लोगों से बात कर प्रस्‍ताव भेजेंगे। सरकार दिव्‍यांगों के कल्‍याण के लिए हमेशा तत्‍पर है।

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