नोटबंदी का असर उमराह पर à¤à¥€, मकà¥â€à¤•ा नहीं जा पा रहे जायरीन
नोटबंदी के चलते धारà¥à¤®à¤¿à¤• यातà¥à¤°à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो रही हैं। छोटे नोट और बड़े नठनोट न होने की वजह से जायरीन उमराह करने के लिठमकà¥à¤•ा नहीं जा पा रहे। आठनवमà¥à¤¬à¤° के बाद से मकà¥à¤•ा जाने वाले सà¤à¥€ गà¥à¤°à¥à¤ª या तो रोक दिठगठहैं या फिर कैंसिल कर दिठगठहैं। इसके चलते जायरीन मायूस हैं। वहीं टूर à¤à¤‚ड टà¥à¤°à¥ˆà¤µà¤² à¤à¤œà¥‡à¤‚सियों का मानना है कि अà¤à¥€ कà¥à¤› नहीं पता कि हालात कब तक ठीक होंगे। हमारा तो यह सीजन ही खराब हो गया।
मौसम और अपने जरूरी इंतजाम को देखते हà¥à¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤ से बहà¥à¤¤ सारे लोग इस दौरान उमराह करने के लिठमकà¥à¤•ा जाते हैं। उमराह करने के लिठजाने का कोई à¤à¥€ वकà¥à¤¤ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ नहीं है। लखनऊ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ मिरà¥à¤œà¤¾ टूर à¤à¤£à¥à¤¡ टà¥à¤°à¥ˆà¤µà¤²à¥à¤¸ के मालिक मिरà¥à¤œà¤¾ मोहमà¥à¤®à¤¦ हलीम बताते हैं कि पिछले वरà¥à¤· दिसंबर में सीजन शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† था, जो जनवरी और फरवरी तक चला था। इस बार नवंबर में ही सीजन शà¥à¤°à¥‚ हो गया था। लेकिन अफसोस कि सिर मà¥à¤‚ड़ाते ही ओले पड़ने लगे। 9 नवमà¥à¤¬à¤° से नोटबंदी के चलते सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। à¤à¤¯à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤‚स के साथ हर साल जो तैयारी रहती है उसमें à¤à¥€ हमें घाटा उठाना पड़ा।
दिसंबर से तो हमारे 100-100 लोगों के गà¥à¤°à¥à¤ª जाने वाले थे, लेकिन नोटबंदी के चलते लोगों ने कैंसिल करा लिया है। कà¥à¤› हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि जलà¥à¤¦ ही हालात ठीक होंगे तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दिसंबर-जनवरी की तारीख ले ली है। आगरा के टूर ऑपरेटर मौलाना कलीमउदà¥à¤¦à¥€à¤¨ बताते हैं कि उमराह के दौरान कम से कम 50 से 60 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का खरà¥à¤š आता है। रहने-खाने का इंतजाम तो टूर ऑपरेटर ही करा देते हैं। इसके अलावा à¤à¥€ हर किसी का आठसे दस हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ खरà¥à¤š हो जाता है।
इसमें चाय-पानी से लेकर लोकल आने-जाने का किराया और अपने देश में लाने के लिठखजूर और आब-à¤-जमजम सहित दूसरी धारà¥à¤®à¤¿à¤• चीजें à¤à¥€ खरीदनी होती हैं। अलीगढ़ में टà¥à¤°à¥ˆà¤µà¤² à¤à¤œà¥‡à¤‚सी चलाने वाले आसिफ अली की मानें तो देशà¤à¤° से हर महीने 80 हजार से लेकर à¤à¤• लाख तक जायरीन उमराह के लिठजाते हैं।
आठनवमà¥à¤¬à¤° को पहà¥à¤‚चे थे मकà¥à¤•ा और नोटबंदी में फंस गà¤
आठनवमà¥à¤¬à¤° की सà¥à¤¬à¤¹ आगरा से 26 लोगों का à¤à¤• गà¥à¤°à¥à¤ª मकà¥à¤•ा के लिठरवाना हà¥à¤† था। गà¥à¤°à¥à¤ª अपने सही वकà¥à¤¤ पर रात में मकà¥à¤•ा पहà¥à¤‚च गया। रात को जाते ही जायरीन अपने होटल में रà¥à¤• गà¤à¥¤ सà¥à¤¬à¤¹ होटल से बाहर निकले तो पता चला कि चाय पीने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वहां की करेंसी रियाल चाहिà¤à¥¤ जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नोट बदलने की कोशिश की तो पता चला की रात को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ करेंसी बंद कर दी गई हैं। मनी à¤à¤•à¥à¤¸à¤šà¥‡à¤‚जर वाले ने à¤à¥€ जायरीनों के à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¤• हजार और 500 के नोट बदलने से मना कर दिया। यह सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही जायरीनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
पà¥à¤°à¤¿à¤‚टिंग मशीन का कारोबार करने वाले जायरीन इशराक ने बताया कि जायरीन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दूतावास पहà¥à¤‚चे तो दो दिन लगातार दूतावास बंद मिला। तीसरे दिन खà¥à¤²à¤¾ तो मिला, लेकिन दूतावास अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि हम कोई आरबीआई नहीं हैं जो नोट बदलें। इशराक बताते हैं कि इस दौरान इंदौर के à¤à¤• यà¥à¤µà¤• ने वहां हम लोगों की छोटे नोट से बड़ी मदद की। तब कहीं जाकर हमने उमराह किया और अपने देश वापस लौटकर आà¤à¥¤