माता-पिता के मकान पर बेटे के हक पर दिलà¥à¤²à¥€ हाईकोरà¥à¤Ÿ ने सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ ये बड़ा फैसला
माता-पिता के मकान पर अपना कानूनी हक समà¤à¤¨à¥‡ वालों के लिठदिलà¥à¤²à¥€ हाईकोरà¥à¤Ÿ ने à¤à¤• नई वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ दी है। दिलà¥à¤²à¥€ उचà¥à¤š नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने कहा है कि किसी बेटे को अपने माता-पिता के खà¥à¤¦ की अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ किये गये घर में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। वह केवल उनकी ‘दया’ पर ही वहां रह सकता है, फिर चाहे बेटा विवाहित हो या अविवाहित। अदालत ने कहा कि चूंकि माता-पिता ने संबंध अचà¥à¤›à¥‡ होने के वकà¥à¤¤ बेटे को घर में रहने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ दी, इसका यह मतलब नहीं कि वे पूरी जिंदगी उसका ‘बोऒ उठायें।
नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥‚मरà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ रानी ने अपने आदेश में कहा कि जहां माता-पिता ने खà¥à¤¦ से कमाकर घर लिया है तो बेटा, चाहे विवाहित हो या अविवाहित, उसे उस घर में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। वह केवल उसी समय तक वहां रह सकता है जब तक के लिये वे उसे रहने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ दें। अदालत ने कहा कि केवल इसलिठकि माता-पिता ने उसे संबंध मधà¥à¤° होने पर घर में रहने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ दी थी, इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता जीवनà¤à¤° उसका बोठसहें।
अदालत ने à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ और उसकी पतà¥à¤¨à¥€ की अपील खारिज करते हà¥à¤ यह फैसला सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ अपील में à¤à¤• निचली अदालत दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ माता-पिता के पकà¥à¤· में दिये गये आदेश को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दी गई थी। माता-पिता ने बेटे और बहू को घर खाली करने का निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ देने का अनà¥à¤°à¥‹à¤§ किया था।