à¤à¤¸à¥â€à¤®à¤¾à¤°à¤¤à¥€ के दौरान महाकालेशà¥â€à¤µà¤° को सबसे पहले बंधी राखी, सवा लाख लडà¥à¤¡à¥à¤“ं का महाà¤à¥‹à¤—
उजà¥à¤œà¥ˆà¤¨à¥¤ रकà¥à¤·à¤¾ बंधन का परà¥à¤µ सबसे पहले महाकाल मंदिर में मनाया गया। पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने तड़के 4 बजे à¤à¤¸à¥à¤®à¤¾à¤°à¤¤à¥€ में राजाधिराज महाकाल को राखी बांधी। इससे पहले à¤à¤—वान का सोने, चांदी के आà¤à¥‚षण व नवीन वसà¥à¤¤à¥à¤° धारण कराकर आकरà¥à¤·à¤• शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार किया गया।
मंदिर की परंपरा अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤—वान को सवा लाख लडà¥à¤¡à¥à¤“ं का महाà¤à¥‹à¤— à¤à¥€ लगाया गया। à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को दिनà¤à¤° लडà¥à¤¡à¥‚ महापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦à¥€ का वितरण हà¥à¤†à¥¤ महाकाल के दिवà¥à¤¯ रूप के दरà¥à¤¶à¤¨ और महापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦à¥€ लेने के लिठदेश-विदेश से हजारों à¤à¤•à¥à¤¤ उमड़े।

महापरà¥à¤µ को देखते हà¥à¤ मंदिर में आकरà¥à¤·à¤• पà¥à¤·à¥à¤ª और विदà¥à¤¯à¥à¤¤ सजà¥à¤œà¤¾ की गई थी। इधर, महाकाल में शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤£ मास के समापन पर जयपà¥à¤° के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ जिया बैंड ने मंदिर के गणेश मंडपमॠमें पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ दी। यह पहला अवसर है जब किसी बैंड ने मंदिर के à¤à¥€à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ दी है।