अखिलेश बोले, नोटबंदी से सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ परेशानी 'बà¥à¤†à¤œà¥€' को
500 और 1000 के नोट बंद किठजाने के फैसले पर उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ अखिलेश यादव ने आज फिर मोदी सरकार को घेरा। अखिलेश ने कहा कि देश जान गया है कि नोटबंदी के लिठकेंदà¥à¤° सरकार की तैयारियां पूरी नहीं थीं। परेशान करने वाली सरकारों को जनता हटा देती है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बहà¥à¤œà¤¨ समाज पारà¥à¤Ÿà¥€ की सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤®à¥‹ मायावती पर à¤à¥€ निशाना साधते हà¥à¤ कहा कि सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तकलीफ तो बà¥à¤†à¤œà¥€ को हो रही है।
अखिलेश यादव ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास से मैतà¥à¤°à¥€ कार रैली को रवाना करने के बाद ये बातें कहीं। दिलà¥à¤²à¥€ से बैंकॉक तक कि इस कार रैली के आयोजन में तीन देशों के 63 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ी शामिल हैं। इस अवसर पर मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने कहा कि देश में 1000 और 500 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के नोट बंद होने के कारण लोगों को तो तकलीफ हो ही रही है, लेकिन सबसे अधिक तकलीफ बà¥à¤†à¤œà¥€ (मायावती) को हो रही है। अखिलेश ने कहा कि बà¥à¤†à¤œà¥€ को हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के नोटों की माला पहनने का बहà¥à¤¤ शौक है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी ने नोट बंद करके बà¥à¤†à¤œà¥€ के शौक पर अंकà¥à¤¶ लगाने का काम किया है। यह ठीक नहीं है। देश में पांच सौ और हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का नोट बंद होने से लोगों को तकलीफ है। इसको लेकर उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार बेहद संजीदा है।
अखिलेश ने कहा है कि हम लोग गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में मोबाइल कैश वैन à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में लगे हैं। इसके साथ ही उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जो सरकार जनता को दà¥à¤– देती है, जनता उसे हटा देती है। अब रà¥à¤ªà¤¯à¤¾ न मिलने के कारण जनता तो दà¥à¤–ी है। केंदà¥à¤° सरकार ने कोई सूà¤à¤¬à¥‚ठसे काम नहीं नहीं किया, जिसका परिणाम आज पूरी जनता को à¤à¥à¤—तना पड़ रहा है।
मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने कहा कि विमà¥à¤¦à¥à¤°à¥€à¤•रण के लिठपीà¤à¤® और केंदà¥à¤° सरकार की तैयारी पूरी नहीं थी। नोटबंदी से किसानों को ही परेशानी पर अखिलेश ने कहा कि केंदà¥à¤° को किसानों की बà¥à¤µà¤¾à¤ˆ की बड़ी चिंता है, मैं कहता हूं कम से कम किसान को तो छूट दे देते। अखिलेश ने कहा कि à¤à¤• बार कई साल पहले à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ फैसला लिया गया था। उस समय जो तकलीफें जनता को हà¥à¤ˆ थीं वही आज à¤à¥€ हो रही हैं। लोगों ने तब à¤à¥€ जानें दी थीं।