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जिन्ना की तस्वीर हटाने के लिए किसी कानून की जरूरत नहीं-BJP

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर देश में सियासत गर्म हो गई है. इस मुद्दे पर देश का सबसे बड़ा न्यूज चैनल आजतक 'जिन्ना एक विलेन पर जंग क्यों' पर पंचायत आयोजित कर रहा है. पांच घंटे चलने वाली इस पंचायत में इस विषय से जुड़ी हस्तियां इसके तमाम पहलुओं पर चर्चा हो रही है. रात 8 से 9 बजे पांचवा सत्र है जिसका नाम - हिंदुस्तान में किसको चाहिए जिन्ना? है. इस सत्र का संचालन अंजना ओम कश्यप कर रही हैं. इसमें वक्ता हैं संबित पात्रा, (बीजेपी प्रवक्ता), राकेश सिन्हा (संघ विचारक), घनश्याम तिवारी (सपा प्रवक्ता), मो. सज्जाद (प्रवक्ता, एएमयू), जफर सरेशवाला (चांसलर, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय हैदराबाद), सुधींद्र कुलकर्णी (राजनीतिक विश्लेषक) केसी त्यागी (जेडीयू) और मोहसिन रजा (राज्यमंत्री यूपी सरकार) हैं.

पांचवा सत्र

जफर सरेशवाला - जिन्ना की सोच की धज्जियां तो मुसलमानों ने 1942 में ही उड़ा दी थीं. जिन्ना की विचारधारा को मुसलमानों ने न सिर्फ नकारा, बल्कि उसे पंक्चर किया. शायद ही कोई हिन्दुस्तान से पाकिस्तान गया. शायद बिहार और कुछ यूपी से ही गए. मुसलमानों ने तो उसी वक्त मुंहतोड़ जवाब दे दिया था. आज हमारे मुल्क की एक पार्टी बार-बार सबको पाकिस्तान भेजने की बात करती है, उनके लिए बता दूं कि हमने जवाब दिया है. सबसे बड़ा शिगाफ हमने दिया है. एएमयू के चांसलर और वाइस चांसलर को अब फ्रंट फुट पर आ जाना चाहिए और बच्चों को समझाना चाहिए. एक नुकसान पहले ही हो चुका है. 12 मई तक परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं. तस्वीर हो या न हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

केसी त्यागी: आजादी के आंदोलन के सबसे बड़ा नेता महात्मा गांधी हैं. जिन्ना को किसी भी तरीके से महिमामंडित करने का प्रयास अच्छा नहीं है. गांधी जी ने कहा था पाकिस्तान मेरी डेड बॉडी पर बनेगा, लेकिन कांग्रेस की थकी हुई लीडरशिप के आगे वे भी बेबस हो गए. गांधी जी को भी विभाजन स्वीकार करना पड़ा. क्या 80 साल के बाद लोगों को पता चला कि यहां जिन्ना की तस्वीर लगी है. मैं तो चाहता हूं कि जिन्ना की तस्वीर हटाकर गांधी जी की तस्वीर लगा देनी चाहिए.


संबित पात्रा: हिन्दुस्तान के कानून में कहीं नहीं लिखा है कि अपने माता-पिता की सेवा करें. फिर भी लोग करते हैं. इसके लिए दिल में जगह होनी चाहिए. जिसने देश का विभाजन कर दिया हो, उसके लिए किसी प्रतियोगिता या कानून बने, इसकी जरूरत ही नहीं होनी चाहिए.

सुधींद्र कुलकर्णी: देश के विभाजन के लिए जिन्ना से ज्यादा अंग्रेज दोषी हैं. और हम आज हिंदू-मुसलमान में लड़ रहे हैं.

मो. सज्जाद: हम जिन्ना के लिए नहीं लड़ रहे हैं. हमारी लड़ाई तो पुलिस ने जो लाठीचार्ज किया, उसके विरोध में है. उप राष्ट्रपति के होने के बावजूद वहां कुछ राष्ट्रवादी संगठनों को जाने दिया गया. हमारी लड़ाई इस बात के लिए है. खत पहुंचने का भी इंतजार नहीं किया गया. जवाब तो दूर की बात.

मोहसिन रजा: एएमयू एक शिक्षण संस्थान है. वहां के बच्चों को अगर आजादी के विलेन के बारे में नहीं बताया जाएगा तो ये देश का नुकसान होगा. हमारे और भी कई महापुरुष हैं. हम उनकी तस्वीर क्यों नहीं लगाते? बच्चों को गुमराह किया जा रहा है. एएमयू के लोग दूसरों के हाथ की कठपुतली बन गए हैं.

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