संगीत विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में सà¥à¤µà¤° पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® संपनà¥à¤¨
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤°à¥¤ राजा मानसिंह तोमर संगीत à¤à¤µà¤‚ कला विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° à¤à¤µà¤‚ संसà¥à¤•ृति संचालनालय मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ शासन à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² के संयà¥à¤•à¥à¤¤ ततà¥à¤µà¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ में आज बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤° 20 दिसमà¥à¤¬à¤° को शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत समारोह सà¥à¤µà¤° पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ का आयोजन किया गया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का आयोजन विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के तानसेन सà¤à¤¾à¤—ार में किया गया। तानसेन समारोह के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ से पूरà¥à¤µ संगीत विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ यह à¤à¤• अनूठा आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी वादन पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ दीं।
यह कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® संसà¥à¤•ृति संचालनालय, संसà¥à¤•ृति विà¤à¤¾à¤— मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ शासन, à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² के सौजनà¥à¤¯ से आयोजित किया गया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में मà¥à¤–à¥à¤¯ अतिथि अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·, राजà¥à¤¯ सामानà¥à¤¯ निरà¥à¤§à¤¨ वरà¥à¤— आयोग बालेनà¥à¤¦à¥ शà¥à¤•à¥à¤², विशिषà¥à¤Ÿ अतिथि à¤à¤²à¤à¤¨à¤¯à¥‚पीयू गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° के कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿ दिलीप दà¥à¤°à¥‡à¤¹à¤¾ उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ थे। अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‹. लवली शरà¥à¤®à¤¾ ने की। सà¥à¤µà¤° à¤à¤µà¤‚ अवनदà¥à¤§ वादà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का उदघाटन अतिथियों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दीप पà¥à¤°à¤œà¥à¤œà¤µà¤²à¤¨ à¤à¤µà¤‚ माठसरसà¥à¤µà¤¤à¥€ पर मालà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤ªà¤£ कर किया गया। इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ संगीत संकाय के छातà¥à¤°-छातà¥à¤°à¤¾à¤“ं ने शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ पारूल दीकà¥à¤·à¤¿à¤¤ के मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ में सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ वंदना पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ की।
संगीत सà¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ उसà¥à¤¤à¤¾à¤¦ मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤«à¤¾ रजा के विचितà¥à¤° वीणा वादन से हà¥à¤†à¥¤ आपने अपने कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ राग चारूकेशी से किया। आलाप जोड़ à¤à¤¾à¤²à¤¾ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ आपने ताल तीनताल में निबदà¥à¤§ मधà¥à¤¯à¤²à¤¯ गत पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ की। आपने अपने वादन का समापन à¤à¤• दादरा के साथ किया। आपके साथ पखावज संगति पं. रविशंकर उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ ने की। उसà¥à¤¤à¤¾à¤¦ मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤«à¤¾ रजा के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ पं. गौरीशंकर करमाकर ने à¤à¤•ल तबला वादन पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया। आपने अपनी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ में ताल तीनताल में पेशकार, कायदे, टà¥à¤•डे, मà¥à¤–डे, परन, चकà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤°, à¤à¤µà¤‚ बनारस तथा पंजाब घराने की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤—त रचनाà¤à¥…ं पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ कीं। लहरा संगति अबà¥à¤¦à¥à¤² हमीद खान ने की।