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उच्च शिक्षा मंत्री ने किया ज्योतिर्विद सम्मेलन का शुभारंभ

ग्वालियर । मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि ज्योर्तिविद विज्ञान ही है ऐसा मेरा मानना है। देश के बडे बडे ज्योतिषाचार्यों को देश के विकास में ज्योतिष विद्या का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही ज्योतिषशास्त्र से आज की पीढी को अवगत कराने के लिए सभी विश्वविद्यालयों में इसका अध्ययन कराया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को इसकी शिक्षा प्राप्त हो, इसके लिए सरकार कार्य करेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने शनिवार को जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में मार्डन एस्ट्रो रिसर्च सोसायटी ग्वालियर और जीवाजी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय ज्योर्विद सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रुप में यह बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। कार्यक्रम में विशिष्ठि अतिथि के रुप में डीआईजी बीएसएफ टेकनपुर कैलाश चन्द जाट, जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव आनंद मिश्रा, संस्था के अध्यक्ष रमेश वायगांवकर, जयपुर के ज्योतिषाचार्य प्रेम शंकर शर्मा उपस्थित थे। दो दिवसीय सम्मेलन में देश भर के ज्योतिषविद उपस्थित रहेगें।
उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि भारत वर्ष में ज्योतिषी विद्या अनादिकाल से विद्यमान है। हमारे देश में ग्रहों की दशा से मनुष्य के भूत व भविष्य का विवरण ज्ञात किया जाता रहा है। हमारे देश में पंचाग भी ज्योतिषियों द्वारा ग्रहों की गणना के मान से तैयार किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश की युवा पीढी को इस विधा से रुबरु कराने और इस विधा को और विकसित करने के लिए हमें इसे शिक्षा पद्वति में शामिल कर इस विधा को और सम्पन्न करना होगा।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया ने कहा कि आज भी हमारे देश में कितना भी सम्पन्न व्यक्ति क्यों न हो लेकिन वह अपना भविष्य जानने के लिए उत्सुक रहता है।किसी भी शुभ कार्य के लिए हम सब शुभ मुहूर्त के लिए ज्योतिषाचार्य के पास ही जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों को अपनी विधा का उपयोग केवल व्यवसाय भर के लिए बल्कि देश के विकास के लिए करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय ज्योर्तिविद सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में पधारे सभी ज्योतिषाचार्य सम्मेलन के दौरान यहां के विद्यार्थियों से भी रुबरु होकर उन्हें इस विधा के बारे में जानकारी दें ताकि उनकी रुचि भी इस दिशा में और विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय में ज्योतिष विद्या पर अध्यापन कार्य किया जा रहा है। प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि हमारे देश की ये सबसे पुरानी और स्थातिप विधा है, आवश्यकता है इसे और अधिक विकसित करने की है।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि बीएसएफ टेकनपुर के डीआईजी कैलाश चन्द जाट ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र आज के कम्प्यूटर युग में गणना के लिए और आसान हो गया है। इस विधा का अधिक से अधिक विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधा से न केवल व्यक्तिगत भविष्य बल्कि प्राकृतिक आपदाओं की भी जानकारी समय समय पर हमें मिलती है। इस विधा का उपयोग जनकल्याण के लिए अधिक से अधिक किया जाना चाहिए। ज्योतिषाचार्य का यह दायित्व है कि वे इस विधा से युवा पीढी को भी अवगत कराएं तथा इसकी महत्ता के बारे में भी जानकारी दें।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष रमेश वायगांवकर ने बताया कि ज्योतिष विद्या को शोधपरक बनाकर विकास करने के लिए ही इस संस्था का गठन किया गया था। वर्ष 1997 में संस्था द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर ज्योतिषाचार्यों का प्रथम सम्मेलन, वर्ष 2007 में द्वितीय सम्मेलन एवं तृतीय सम्मेलन वर्ष 2017 में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देशभर भर से पधारे ज्योतिषाचार्य अपने शोध का वाचन करेगें तथा नए शोधों की जानकारियों से नए युवा ज्योतिषियों को अवगत कराएंगे।

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